Delhi Metro Golden Line: Delhi NCR में रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। दिल्ली मेट्रो की नई गोल्डन लाइन जल्दी ही शुरू होने वाली है, जिससे एयरपोर्ट जाना बहुत आसान हो जाएगा। खासकर हरियाणा के बल्लभगढ़, फरीदाबाद और दिल्ली के बदरपुर इलाके के लोगों के लिए यह बहुत बड़ी राहत होगी। अभी तक इन इलाकों से एयरपोर्ट जाने में 2 घंटे तक का समय लग जाता था, लेकिन गोल्डन लाइन के बाद सिर्फ 1 घंटे में एयरपोर्ट पहुंच सकेंगे। यह बात दिल्ली मेट्रो के अधिकारियों ने कही है।
तुगलकाबाद स्टेशन-
गोल्डन लाइन का सबसे खास स्टेशन तुगलकाबाद होगा। यह स्टेशन बिल्कुल अलग है, क्योंकि यह चार मंजिल का अंडरग्राउंड स्टेशन है। यह स्टेशन जमीन से 23 मीटर नीचे बनाया जा रहा है। इस स्टेशन की सबसे बड़ी खासियत यह है, कि यहां 250 गाड़ियों के लिए अंडरग्राउंड पार्किंग की जगह है। मतलब आप अपनी गाड़ी पार्क करके मेट्रो से कहीं भी जा सकते हैं। दिल्ली मेट्रो में यह पहला ऐसा स्टेशन होगा, जहां इतनी बड़ी अंडरग्राउंड पार्किंग होगी।
दो मेट्रो लाइनों का मिलन-
तुगलकाबाद स्टेशन पर दो मेट्रो लाइनें मिलती हैं, वायलेट लाइन और गोल्डन लाइन। दोनों स्टेशन एक 45 मीटर लंबी सुरंग से जुड़े होंगे। इससे लोग आसानी से एक लाइन से दूसरी लाइन में जा सकेंगे। अभी वायलेट लाइन पर तुगलकाबाद स्टेशन ऊपर बना है, लेकिन गोल्डन लाइन का स्टेशन जमीन के नीचे बन रहा है। यह एक बड़ा इंजीनियरिंग का काम है।
रेल की पटरी के नीचे से गुजरेगी मेट्रो-
तुगलकाबाद स्टेशन की एक और खास बात यह है, कि यह इंडियन रेलवे से भी जुड़ेगा। यहां एक सुरंग बनाई गई है, जो रेलवे की पटरी के नीचे से होकर गुजरती है। यह सुरंग रेलवे लाइन से 18 मीटर नीचे है। मतलब ऊपर से ट्रेन गुजरेगी और 18 मीटर नीचे से मेट्रो। यह बहुत ही कमाल का इंजीनियरिंग काम है।
हरियाणा के लोगों को मिलेगा सीधा फायदा-
गोल्डन लाइन से सबसे ज्यादा फायदा हरियाणा के लोगों को होगा। बल्लभगढ़, फरीदाबाद और बदरपुर के लोग वायलेट लाइन से आकर तुगलकाबाद में उतरकर गोल्डन लाइन पकड़ सकेंगे। इससे वे सीधे एरोसिटी पहुंच जाएंगे। एरोसिटी से एयरपोर्ट एक्सप्रेस की मेट्रो मिलती है, जो सीधे IGI एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 तक जाती है। इसके अलावा गोल्डन लाइन का विस्तार करके इसे टर्मिनल 1 तक भी ले जाया जाएगा।
अब सिर्फ 1 घंटे में एयरपोर्ट-
अभी बल्लभगढ़ या फरीदाबाद से एयरपोर्ट जाने के लिए पहले वायलेट लाइन से कालकाजी जाना पड़ता है। फिर वहां से मैजेंटा लाइन पकड़कर एयरपोर्ट जाना पड़ता है। इस पूरे सफर में करीब 2 घंटे लग जाते हैं। लेकिन गोल्डन लाइन के बाद यह सफर सिर्फ 1 घंटे में पूरा हो जाएगा। इससे लोगों का बहुत समय बचेगा। अब उन्हें फ्लाइट के लिए 4-5 घंटे पहले घर से नहीं निकलना पड़ेगा।
गोल्डन लाइन की पूरी जानकारी-
दिल्ली मेट्रो की गोल्डन लाइन कुल 23.6 किलोमीटर लंबी है। इसमें से 19.3 किलोमीटर पूरी तरह जमीन के नीचे है और 4.2 किलोमीटर ऊपर बनी है। इस लाइन में कुल 15 स्टेशन होंगे। इनमें से 11 स्टेशन जमीन के नीचे होंगे और 4 स्टेशन ऊपर होंगे। इस लाइन में 4 इंटरचेंज स्टेशन होंगे जहां दूसरी मेट्रो लाइनें मिलती हैं। ये हैं तुगलकाबाद, साकेत जी ब्लॉक, छतरपुर और एरोसिटी।
70% काम पूरा हो चुका है-
गोल्डन लाइन का 70% काम पूरा हो चुका है। दिल्ली मेट्रो के अधिकारियों का कहना है, कि अगले साल तक यह लाइन पूरी तरह तैयार हो जाएगी। तुगलकाबाद का नया अंडरग्राउंड स्टेशन भी बनकर तैयार हो जाएगा।
हरियाणा के लोगों को कई फायदे-
गोल्डन लाइन से हरियाणा के लोगों को कई फायदे होंगे। यह फरीदाबाद को सीधे दिल्ली और गुड़गांव से जोड़ेगी। इससे यात्रा का समय कम होगा और आना-जाना आसान हो जाएगा।
दिल्ली मेट्रो की दूसरी लाइनों पर भीड़ भी कम होगी, क्योंकि लोगों के पास अब और रास्ते होंगे। फरीदाबाद से दिल्ली और गुड़गांव जाने में कम समय लगेगा, जिससे लोगों का समय और पैसा दोनों बचेगा। यह लाइन बस और रेलवे जैसे दूसरे साधनों के साथ भी बेहतर कनेक्शन देगी। बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार और नौकरी के नए अवसर भी मिलेंगे।
दुनिया की सबसे बड़ी मेट्रो बनने की तैयारी-
गोल्डन लाइन के तैयार होने के बाद दिल्ली मेट्रो का कुल नेटवर्क 400 किलोमीटर से ज्यादा हो जाएगा। इससे दिल्ली मेट्रो दुनिया की सबसे बड़ी शहरी मेट्रो प्रणाली बन जाएगी। यह सिर्फ दिल्ली के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात होगी। गोल्डन लाइन के बाद फेज 5 पर भी काम शुरू होगा, जिसमें 18 नए कॉरिडोर बनाए जाएंगे।
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कब तक मिलेगी यह सुविधा-
दिल्ली मेट्रो के अधिकारियों के अनुसार गोल्डन लाइन 2025 के अंत तक पूरी तरह तैयार हो जाएगी। तुगलकाबाद का खास अंडरग्राउंड स्टेशन भी उसी समय चालू हो जाएगा। इससे दिल्ली, हरियाणा और पूरे एनसीआर के लाखों लोगों को फायदा होगा। खासकर वे लोग जिन्हें काम के सिलसिले में या छुट्टी मनाने के लिए एयरपोर्ट आना-जाना पड़ता है।
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