Faridabad Mayor Election
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    Faridabad Mayor Election: फरीदाबाद की राजनीति में आज एक बड़ी उथल-पुथल देखने को मिली है। शहर के सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव को लेकर जो उम्मीदें लगाई जा रही थीं, वे आज धराशायी हो गईं। पूरे दिन चली बैठकों और लंबी राजनीतिक मशवरों के बावजूद भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका है। सुबह 11 बजे निगम सदन में होने वाली बैठक से जो उम्मीदें थीं, वे शाम तक आते-आते टूट गईं। केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर के नेतृत्व में चली इस पूरी कवायद में तीन विधायक पार्षदों ने भी हिस्सा लिया, लेकिन आम सहमति बनाने में सभी नाकाम रहे।

    क्या था पूरा मामला और कहां अटका पेच-

    यह चुनाव सिर्फ एक आम प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि फरीदाबाद की स्थानीय राजनीति का एक अहम हिस्सा था। सुबह से ही निगम सदन में गहमागहमी का माहौल था। केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, विधायक मूलचंद शर्मा, विधायक सतीश पाना और विधायक गणेश अलखा, ये चारों नेता सुबह ठीक 11 बजे निगम सदन पहुंचे थे।

    इन चुनावों में सिर्फ सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पद ही नहीं, बल्कि वित्त समिति के दो सदस्य भी चुने जाने थे। कुल मिलाकर चार अहम पदों के लिए नाम तय करने थे, जिन पर सहमति बनाना मुश्किल साबित हुआ। सभी पार्षद अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे और किसी भी तरह का समझौता नहीं हो सका।

    सरकार की तरफ से आया पर्यवेक्षक

    राज्य सरकार की तरफ से कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पवार को पर्यवेक्षक के तौर पर भेजा गया था। उन्होंने तमाम पार्षदों से एक-एक करके बात की और उनकी राय जानने की कोशिश की। हर पार्षद से पूछा गया, कि वे किसके पक्ष में खड़े हैं, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के बाद भी कोई स्पष्ट तस्वीर नहीं बन सकी।

    केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर पूरे दिन निगम सभागार में बैठे रहे। दो बार वे सेक्टर 15 स्थित भाजपा के कार्यालय भी गए जहां कृष्ण लाल पवार मौजूद थे। वहां भी अलग से बैठक हुई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिल सकी। हर बार लगता था, कि बात बन जाएगी, लेकिन कुछ न कुछ अड़चन आ जाती थी।

    सीनियर डिप्टी मेयर के नाम पर अटका पूरा खेल-

    सूत्रों की मानें तो, असल समस्या सीनियर डिप्टी मेयर के पद को लेकर थी। केंद्रीय राज्य मंत्री राजेश नागर और कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल जिस नाम पर सहमत नहीं थे, उसी को लेकर पूरा पेच फंस गया। यह असहमति इतनी गहरी थी, कि पूरे दिन की मशक्कत के बाद भी हल नहीं हो सकी। राजनीतिक जानकारों का मानना है, कि यह सिर्फ एक साधारण चुनाव नहीं था। बल्कि पार्टी के अंदर की आंतरिक राजनीति का भी मामला था। अलग-अलग गुटों के बीच ताकत के संतुलन को लेकर जो तनाव हैं, वे इस चुनाव में साफ तौर पर दिखाई दीं।

    मुख्यमंत्री पर भरोसा जताते हुए कृष्णपाल गुर्जर का बयान-

    चुनाव स्थगित होने के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर का बयान काफी महत्वपूर्ण था। उन्होंने साफ तौर पर कहा, कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर उनका पूरा भरोसा है और वे लोकतंत्र का सम्मान करेंगे। यह बयान इस बात का संकेत है, कि अंतिम फैसला अभी भी लंबित है और ऊंचे स्तर पर सलाह-मशविरा हो रहा है। गुर्जर ने यह भी कहा, कि जब भी उपयुक्त दिन मिलेगा, यह चुनाव कराए जा सकते हैं। यह कूटनीतिक तरीका था, यह कहने का कि अभी मसला हल नहीं हुआ है।

    क्यों चुनाव हुआ पोस्पोन-

    चुनाव स्थगित होने के लिए कुछ तकनीकी कारण भी दिए गए। कृष्णपाल गुर्जर की तरफ से यह कहा गया, कि निगम आयुक्त उपलब्ध नहीं था। लेकिन जब सवाल पूछा गया, तो पता चला, कि दोपहर तक आयुक्त वहीं मौजूद था और उसने सबके साथ खाना भी खाया था।

    यह दिलचस्प बात है, कि जैसे ही राजनीतिक समीकरण बदलने लगे, आयुक्त भी गायब हो गया। इससे लगता है, कि यह सिर्फ तकनीकी मुद्दा नहीं बल्कि जानबूझकर की गई रणनीति का हिस्सा था। मेयर प्रवीण जोशी भी पूरे दिन निगम सभागार में नहीं दिखीं और सेक्टर 15 के जिला कार्यालय में पर्यवेक्षकों के साथ बैठी रहीं।

    अनसुलझे सवालों का जवाब-

    यह पूरा प्रकरण फरीदाबाद की स्थानीय राजनीति की जटिलता को दर्शाता है। सिर्फ चार पदों के लिए इतनी लंबी राजनीतिक कवायद का होना यह बताता है, कि दांव कितने ऊंचे हैं। अब सवाल यह है, कि क्या अगली बार सहमति बन पाएगी या फिर यह गतिरोध जारी रहेगा।