Bengaluru Ragging Case: बेंगलुरु के देवनहल्ली इलाके में एक एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में रैगिंग का एक बेहद शॉकिंग मामला सामने आया है, जिसने कैंपस सेफ्टी और एंटी रैगिंग नियमों को लेकर फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना में फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट्स के साथ मारपीट और जबरदस्ती का आरोप लगा है।
पुलिस ने तेईस सीनियर स्टूडेंट्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। यह घटना बताती है कि आज भी कॉलेजों में रैगिंग जैसी बुराई कितनी गहराई से मौजूद है और इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
जूनियर्स को शराब और सिगरेट लाने के लिए किया मजबूर-
देवनहल्ली पुलिस के अनुसार यह गंभीर रैगिंग इंसिडेंट देवनहल्ली टाउन के एक इंस्टीट्यूट में हुआ। शिकायत के मुताबिक, सीनियर स्टूडेंट्स ने फर्स्ट ईयर के जूनियर स्टूडेंट्स को शराब और सिगरेट लाने के लिए मजबूर किया। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, जूनियर स्टूडेंट्स को घंटों तक अपनी किताबें हाथ में पकड़कर खड़े रहने की सजा भी दी गई।
यह सिर्फ मेंटल हैरेसमेंट नहीं था। बल्कि फिजिकल टॉर्चर का भी मामला था। जूनियर स्टूडेंट्स को इतना डराया गया कि वे इस बारे में किसी को बताने से भी डर रहे थे। लेकिन जब बात कॉलेज एडमिनिस्ट्रेशन तक पहुंची तो चीजें और भी गंभीर हो गईं।
कॉलेज हेड पर हमला और स्टूडेंट्स की पिटाई-
जब कॉलेज एडमिनिस्ट्रेशन के हेड मिडुन माधवन इस मामले की जांच करने गए, तो गुस्साए सीनियर स्टूडेंट्स के एक ग्रुप ने उन पर ही हमला कर दिया। यह घटना दिखाती है, कि सीनियर स्टूडेंट्स कितने एग्रेसिव और वायलेंट थे। इतना ही नहीं, आरोप है कि सीनियर स्टूडेंट्स ने जूनियर स्टूडेंट्स को लोहे की रॉड, पत्थर और लकड़ी की डंडों से भी पीटा।
यह पूरी तरह से क्रिमिनल एक्टिविटी थी। जिसमें स्टूडेंट्स की जान को भी खतरा था। रिपोर्ट के अनुसार इस घटना के दौरान एक स्टूडेंट की गोल्ड चेन भी छीन ली गई। यह घटना सिर्फ रैगिंग नहीं बल्कि लूटपाट और असॉल्ट का केस भी बन गया।
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पुलिस की तेज कार्रवाई, तीन गिरफ्तार-
देवनहल्ली पुलिस स्टेशन में इस मामले में केस रजिस्टर किया गया है। पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि अभी भी बीस आरोपी स्टूडेंट्स फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है। पुलिस का कहना है, कि जल्द ही बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। यह केस बेंगलुरु रूरल डिस्ट्रिक्ट में कैंपस सेफ्टी और एंटी रैगिंग लॉ के इम्प्लीमेंटेशन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस में ऐसी घटनाएं स्टूडेंट्स के मेंटल और फिजिकल हेल्थ के लिए बेहद खतरनाक हैं।
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