EV Charging Safety
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    EV Charging Safety: पेट्रोल कार छोड़कर इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) अपनाना आज के दौर में किसी गेम-चेंजर से कम नहीं है। न पेट्रोल पंप की लाइन, न बढ़ती कीमतों की टेंशन- बस प्लग लगाइए और निकल पड़िए। पिछले साल भारत की सड़कों पर 20 लाख से ज्यादा EVs उतरीं, जो दिखाता है, कि लोग तेजी से इस बदलाव को अपना रहे हैं। लेकिन सच यह भी है, कि पेट्रोल से EV पर शिफ्ट करते वक्त कुछ नई आदतें डालना बेहद जरूरी है, ताकि बैटरी भी खुश रहे, परिवार भी सुरक्षित रहे और मेंटेनेंस का खर्च भी काबू में रहे।

    सही चार्जर का चुनाव-

    EV खरीदते ही सबसे पहला सवाल आता है, चार्ज कहां और कैसे करें? भारत में ज्यादातर इलेक्ट्रिक कारें CCS2 चार्जिंग पोर्ट के साथ आती हैं, इसलिए चार्जर मैच करना बेहद जरूरी है। हाईवे पर फास्ट चार्जर तुरंत चार्ज देने में आकर्षक लगते हैं, लेकिन रोज़मर्रा में उनका इस्तेमाल बैटरी को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकता है। ज्यादा हीट से बैटरी सेल्स पर दबाव पड़ता है। बेहतर यही है कि घर पर रात में AC चार्जर से आराम से चार्ज किया जाए, जो बैटरी की लाइफ को लंबा रखता है।

    रोज़मर्रा में 80% चार्ज ही क्यों सही है?

    EV का Battery Management System काफी स्मार्ट होता है और ओवरचार्ज से बचाव करता है। फिर भी एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं, कि डेली यूज़ के लिए बैटरी को 80 प्रतिशत तक ही चार्ज रखें। इसे ऐसे समझिए जैसे रोज़ पानी की बोतल को पूरा भरने के बजाय थोड़ा स्पेस छोड़ देना। इससे बैटरी पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता और महीनों तक परफॉर्मेंस बनी रहती है। लंबी यात्रा पर जाना हो, तब ही 100 प्रतिशत चार्ज का ऑप्शन चुनें।

    सस्ते के चक्कर में केबल से समझौता न करें-

    चार्जिंग केबल और प्लग EV के लिए उतने ही जरूरी हैं, जितना दिल इंसान के लिए। हमेशा कंपनी या डीलर द्वारा दी गई BIS सर्टिफाइड केबल ही इस्तेमाल करें। हफ्ते में एक बार केबल को ध्यान से देख लें, कहीं कट, मुड़े हुए पिन या ज्यादा गर्म होने के निशान तो नहीं। खराब केबल से शॉर्ट सर्किट या आग का खतरा बढ़ सकता है, और ऐसी परेशानी कोई नहीं चाहता।

    चार्जिंग की जगह भी मायने रखती है-

    पानी और बिजली का कॉम्बिनेशन हमेशा खतरनाक होता है। EV को ऐसे गैराज में चार्ज करें जहां अच्छा वेंटिलेशन हो और नमी न हो। बंद, गर्म और हवा रहित जगहों पर चार्जिंग से हीट फंस जाती है, जो बैटरी के लिए सही नहीं। अगर चार्ज करते वक्त अजीब सी आवाज, बदबू या असामान्य गर्मी महसूस हो, तो तुरंत प्लग निकालें और सर्विस सेंटर से संपर्क करें।

    EV से जुड़े मिथ तोड़ना भी जरूरी-

    कई लोग मानते हैं कि रातभर चार्जिंग हमेशा बेस्ट होती है, लेकिन सच यह है कि ऐप के जरिए चार्जिंग शेड्यूल करना ज्यादा समझदारी है। साथ ही हर 10,000 किलोमीटर पर सर्विस चेक कराना छोटी समस्याओं को बड़े खर्च में बदलने से रोकता है। यह भी जान लें कि “ठंडे मौसम में EV चार्ज नहीं होती” जैसी बातें पुराने जमाने की हैं, आधुनिक EV भारतीय मौसम को ध्यान में रखकर ही डिजाइन की गई हैं।

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    समझदारी से चलाएं, बेफिक्र रहें-

    EV सिर्फ एक गाड़ी नहीं, बल्कि एक नई लाइफस्टाइल है। थोड़ी सी समझदारी और सही आदतें अपनाकर आप न सिर्फ अपनी बैटरी की उम्र बढ़ा सकते हैं, बल्कि लंबे समय तक बिना टेंशन के इलेक्ट्रिक ड्राइव का मज़ा भी ले सकते हैं।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।