Faridabad Electricity Strike: फरीदाबाद में पिछले दो-तीन दिनों से बिजली गुल है और इसका सीधा असर पानी की सप्लाई पर पड़ा है। परेशान लोग अब पूर्व मंत्री और विधायक मूलचंद शर्मा के कार्यालय के बाहर धरना और प्रदर्शन कर रहे हैं। आइए समझते हैं पूरा मामला क्या है।
फरीदाबाद में क्या हो रहा है?
बताया जा रहा है, कि शहर में पिछले 2 दिनों से बिजली की आपूर्ति ठप है। बिजली न होने से पानी की सप्लाई भी पूरी तरह रुक गई है, क्योंकि पानी के सिस्टम बिजली से चलते हैं। घरों में न बिजली है, न पानी, और लोगों की रोज़ की ज़िंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है।
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— 𝐑𝐎𝐇𝐓𝐀𝐒H 🐦 (@Rohtashmandan25) October 23, 2026
बिजली कब लौटेगी?
फ़िलहाल बिजली पूरी तरह कब बहाल होगी, इसकी कोई पक्की तारीख़ या समय सरकार या बिजली विभाग ने नहीं बताया है। हड़ताल 24 अक्टूबर तक चलनी तय है, और यूनियनों ने आंदोलन वापस नहीं लिया है। उनकी माँग है कि Eleven Power को दिया गया लाइसेंस रद्द हो, और जब तक ऐसा नहीं होता, वे पीछे हटने को तैयार नहीं दिखते।
सरकार का कहना है कि वो HERC के आदेश को कानूनी रास्ते से चुनौती देगी और उसने कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की है। प्रशासन ने अस्पतालों, पीने के पानी के पंपिंग स्टेशनों और मेट्रो जैसी ज़रूरी सेवाओं को बिजली देने में प्राथमिकता देने को कहा है। इसका मतलब है कि आम घरों में सप्लाई बहाल होने में अभी वक़्त लग सकता है।
बिजली संकट की वजह क्या है?
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल चल रही है। कर्मचारी बिजली क्षेत्र के निजीकरण और स्मार्ट मीटर के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक हड़ताल की वजह से बिजली व्यवस्था बिगड़ गई है और फरीदाबाद में हज़ारों शिकायतें दर्ज हुई हैं।
लोगों का गुस्सा क्यों है?
प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है, कि आम घरों में बिजली और पानी नहीं है, बच्चे और बुज़ुर्ग सबसे ज़्यादा परेशान हैं, जबकि नेताओं के घरों में बिजली आती रही है। इसी नाराज़गी में लोग विधायक के कार्यालय के बाहर पहुँचे। ध्यान रहे कि ये लोगों का आरोप है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
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कहां हुए प्रदर्शन?
बिजली और पानी की मांग को लेकर लोगों ने बल्लभगढ़ नेशनल हाईवे और फरीदाबाद के कई चौराहों पर भी जाम लगाया। इससे आम यातायात पर भी असर पड़ा। बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं ठप होने से लोगों का सब्र टूटता दिख रहा है। एक तरफ़ कर्मचारियों की हड़ताल है, दूसरी तरफ़ आम लोग परेशान हैं। अब नज़र इस पर है कि सरकार और यूनियनों के बीच बात कब बनती है और सप्लाई कब बहाल होती है।
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