SIR Protest: रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को मध्य दिल्ली की सड़कों पर एक अलग ही नज़ारा दिखा। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के समर्थन वाले सिटीज़न मार्च में सैकड़ों सिविल सोसाइटी एक्टिविस्ट, छात्र और युवा संगठनों के सदस्य शामिल हुए। ये सभी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और मतदाता सूची के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) को रद्द करने की मांग कर रहे थे। यह विरोध प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा, जबकि इसकी शुरुआत 2 अक्टूबर को हुई थी।
जंतर मंतर से पहले ही रोक दिए गए मार्चर्स-
अशोक रोड के पास से गुज़र रहे प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर की ओर बढ़ने से रोक दिया। भारी बैरिकेडिंग के बीच पुलिस ने कम से कम 500 लोगों को हिरासत में ले लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीन दिनों के इस आंदोलन में निषेधाज्ञा के तहत हज़ारों लोगों को अस्थायी तौर पर हिरासत में रखा जा चुका है। सोचिए, जो लोग अपनी बात शांति से रखने निकले थे, उन्हें दिन के आखिर में पुलिस की गाड़ियों में बैठना पड़ा।
🇮🇳🚨 Thousands of protesters took to the streets in Delhi and Mumbai, demanding India’s election chief Gyanesh Kumar resign over controversial voter-roll changes Police detained protesters for a third straight day as tensions escalate https://t.co/2dBWHxXwOI
— McKensit II (@McKensitII) October 4, 2026
आखिर क्यों भड़का है गुस्सा?
इस पूरे आंदोलन की जड़ में चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं और बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। आम आदमी के लिए वोटर लिस्ट में नाम होना सिर्फ एक कागज़ी औपचारिकता नहीं, बल्कि लोकतंत्र में अपनी हिस्सेदारी का सबूत है। अगर किसी का नाम बिना वजह कट जाए, तो उसकी आवाज़ ही दब जाती है। यही डर इन युवाओं और एक्टिविस्ट्स को सड़कों पर ले आया है।
कौन-कौन है आंदोलन के चेहरे?
इस मल्टी-डे डेमोंस्ट्रेशन का नेतृत्व करने वालों में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और कपिल सिब्बल, तथा राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव जैसे जाने-माने नाम शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग साफ है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को तुरंत हटाया जाए और SIR प्रक्रिया को पूरी तरह खत्म कर मतदाता सूचियों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए गहन समीक्षा की जाए।
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पुलिस और चुनाव आयोग का क्या कहना है?
डॉयचे वेले (DW) की रिपोर्टिंग के अनुसार, दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के पास मध्य दिल्ली में जमा होने की औपचारिक अनुमति नहीं थी, इसीलिए बैरिकेड लगाए गए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग पहले ही गड़बड़ी के सभी आरोपों को खारिज कर चुका है और उसका दावा है, कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण तय नियमों और प्रक्रिया के तहत ही किया गया है।
एक तरफ़ सवाल उठाने वाले लोग हैं और दूसरी तरफ़ सफाई देने वाली संस्थाएं। अब देखना यह है, कि क्या यह आंदोलन आगे और बड़ा रूप लेता है या सरकार और आयोग इन मांगों पर कोई ठोस जवाब देते हैं। फिलहाल इतना तय है, कि वोटर लिस्ट का मुद्दा अब सिर्फ दफ्तरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दिल्ली की सड़कों पर गूंज रहा है।
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