Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के राम मंदिर में दान के पैसे की कथित चोरी के मामले में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से एक अविनाश शुक्ला ने पुलिस पूछताछ के दौरान कई ऐसे खुलासे किए हैं, जिन्होंने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी ने बताया, कि चोरी किए गए पैसों को पहले मंदिर परिसर के वॉशरूम और अन्य कम निगरानी वाले स्थानों पर छिपाया जाता था। बाद में मौका मिलने पर उन्हें बाहर निकाला जाता था ताकि किसी को शक न हो।
करोड़ों रुपये की चोरी का दावा-
अंग्रेज़ी समाचार वेबसाइट इंडिया टूडे के मुताबिक, मंगलवार को अदालत की अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने अविनाश शुक्ला से करीब दो घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान उसने कथित तौर पर स्वीकार किया कि लंबे समय से दान राशि में गड़बड़ी की जा रही थी और इसमें करोड़ों रुपये का लेन-देन शामिल था। पूछताछ के दौरान उसने यह भी बताया कि दान गिनने की प्रक्रिया में मौजूद कुछ कमजोरियों का फायदा उठाकर चोरी को अंजाम दिया जाता था।
इस मामले में मंदिर ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा का नाम भी एक बार फिर सामने आया है। आरोपी ने दावा किया कि दान की गिनती की प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। हालांकि पुलिस अभी इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की पुष्टि की जा रही है।
CCTV की जानकारी का फायदा0
सूत्रों के अनुसार, अविनाश शुक्ला ने बताया कि आरोपी रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव के पास दान गिनती कक्ष की एक चाबी तक पहुंच थी, जबकि दूसरी चाबी बैंक कर्मचारियों के पास रहती थी। आरोपी का दावा है कि चोरी किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं बल्कि आपसी तालमेल के साथ की जाती थी। जब एक व्यक्ति पैसे निकालता था, तब बाकी लोग उसके आसपास ऐसा माहौल बना देते थे कि किसी का ध्यान उस पर न जाए।
जांच में यह भी सामने आया है कि सभी आरोपी मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों की लोकेशन से अच्छी तरह परिचित थे। इसी वजह से वे कैमरों की नजर से बचने वाले स्थानों का इस्तेमाल करते थे। आरोप है कि चोरी की गई रकम को पहले बाथरूम जैसे स्थानों पर छिपाया जाता था और बाद में सुरक्षित तरीके से बाहर ले जाया जाता था।
निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल-
पूरे मामले के सामने आने के बाद मंदिर परिसर की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। आरोपी ने पुलिस को बताया कि कैमरों की फुटेज कंट्रोल रूम से देखी जाती थी, लेकिन कर्मचारियों की गतिविधियों पर लगातार नजर नहीं रखी जाती थी। इसी कमी का फायदा उठाकर कथित तौर पर यह खेल लंबे समय तक चलता रहा।
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि चोरी की रकम आखिर कहां-कहां खर्च की गई। शुरुआती जांच में सामने आया है कि कुछ पैसे से जमीन और मकान खरीदे गए हो सकते हैं। जांच एजेंसियां आरोपियों की संपत्तियों और बैंक खातों की पड़ताल कर रही हैं ताकि पूरे पैसों का हिसाब सामने लाया जा सके।
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SIT जांच से पहले ही हुई थी रकम की बरामदगी-
दान चोरी के आरोप सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। हालांकि अब यह जानकारी भी सामने आई है कि ट्रस्ट ने 5 जून को ही अविनाश शुक्ला के घर से 58 लाख रुपये बरामद कर लिए थे। यह कार्रवाई एफआईआर दर्ज होने से पहले की बताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, बाकी रकम भी 5 से 8 जून के बीच बैंक ट्रांसफर के जरिए वापस की गई थी। इससे संकेत मिलता है कि धन की रिकवरी की प्रक्रिया कानूनी कार्रवाई शुरू होने से पहले ही शुरू हो चुकी थी। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित घोटाले में और कितने लोग शामिल थे तथा आखिर इतने लंबे समय तक यह मामला सामने क्यों नहीं आया।
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