Telangana Coal Missing Case: तेलंगाना की सरकारी कोयला कंपनी सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) इन दिनों एक ऐसे विवाद के केंद्र में है, जिसने राजनीतिक गलियारों से लेकर उद्योग जगत तक हलचल मचा दी है। आरोप है, कि कंपनी के स्टॉकयार्ड से करीब 40 लाख टन कोयला गायब हो गया है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹1,600 करोड़ बताई जा रही है। मामला सामने आने के बाद केंद्र और राज्य सरकार के बीच भी चर्चा तेज हो गई है, जबकि विपक्ष इसे बड़े घोटाले की आशंका से जोड़कर देख रहा है।
आखिर क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट्स की मानें तो, SCCL के रिकॉर्ड में बड़ी मात्रा में कोयला स्टॉक मौजूद दिखाया गया था, लेकिन जब ग्राइंड लेवल पर चेकिंग हुई यानी फिजिकल वेरिफिकेशन की बात हुई, तो कई जगहो पर स्टॉक रिकॉर्ड से काफी कम पाया गया। इसी वजह से यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। अब सवाल यह उठ रहा है, कि रिकॉर्ड में कोयला मौजूद था, तो वह आखिर गया कहां?
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को पत्र लिखकर तत्काल और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है, कि इतनी बड़ी मात्रा में कोयले का कथित तौर पर गायब होना किसी मामूली प्रशासनिक चूक का मामला नहीं माना जा सकता।
किन खदानों से जुड़ा है विवाद?
विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों के मुताबिक, यह कथित कमी मुख्य रूप से मंदामर्री, श्रीरामपुर, रामगुंडम-1, रामगुंडम-2 और भूपालपल्ली जैसे प्रमुख कोयला क्षेत्रों से जुड़ी बताई जा रही है। इन क्षेत्रों में मौजूद स्टॉक और रिकॉर्ड के बीच अंतर को लेकर अब जांच की मांग हो रही है।
कागज़ पर पूरा, जमीन पर गायब-
इस पूरे विवाद की सबसे चौंकाने वाली बात यह है, कि कंपनी के दस्तावेजों में स्टॉक पूरा दिखाई देने का दावा किया जा रहा है, जबकि असलियत अलग बताई जा रही है। यही वजह है, कि विपक्ष और कई राजनीतिक दल इस मामले को “कागज़ पर पूरा, जमीन पर गायब” कहकर सरकार को घेर रहे हैं।
अगर जांच में यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सिर्फ वित्तीय नुकसान का मामला नहीं होगा, बल्कि कंपनी की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े होंगे।
कितना बड़ा है 40 लाख टन कोयले का आंकड़ा?
40 लाख टन कोयले की मात्रा को समझना आसान नहीं है। इतनी मात्रा को ढोने के लिए लगभग 1.6 लाख ट्रकों की जरूरत पड़ सकती है। इन ट्रकों को एक लाइन में खड़ा किया जाए, तो उनकी कतार करीब 1,900 किलोमीटर तक पहुंच सकती है।ऊर्जा क्षेत्र के नजरिए से देखें, तो इतनी मात्रा का कोयला 1,000 मेगावाट क्षमता वाले बड़े थर्मल पावर प्लांट को कई महीनों तक चलाने में सक्षम माना जाता है। यही कारण है, कि इस मामले को गंभीर माना जा रहा है।
पहले से आर्थिक दबाव में है SCCL-
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब SCCL पहले से चुनौतियों का सामना कर रही है। बताया जा रहा है, कि तेलंगाना सरकार पर कंपनी का ₹51,500 करोड़ से अधिक का बकाया है। वहीं कंपनी के 40 हजार से अधिक कर्मचारियों और उनके परिवारों की जिम्मेदारी भी उसके ऊपर है।
| महत्वपूर्ण जानकारी | विवरण |
|---|---|
| कथित गायब कोयला | 40 लाख टन |
| अनुमानित कीमत | ₹1,600 करोड़ |
| कंपनी | SCCL |
| राज्य सरकार की हिस्सेदारी | 51% |
| केंद्र सरकार की हिस्सेदारी | 49% |
| सरकारी बकाया | ₹51,500 करोड़ से ज़्यादा |
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जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर-
इस मामले में सच जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। यह अभी स्पष्ट नहीं है, कि मामला तकनीकी गड़बड़ी का है या फिर किसी बड़े स्तर की लापरवाही का। हालांकि एक बात साफ है, कि इस विवाद ने तेलंगाना की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। अब सभी की नजर संभावित जांच रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है।
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