Ground Water of India: सोचिए एक सुबह आप उठते हैं, किचन में जाते हैं और जैसे ही नल खोलते हैं, उसमें से पानी की एक बूंद भी नहीं आती। पहले आपको लगता है, कि शायद मोटर बंद होगी, लेकिन फिर पता चलता है, कि पूरे शहर का पानी खत्म हो चुका है। लोग सड़कों पर बाल्टियां लेकर दौड़ रहे हैं, पानी के टैंकरों के पीछे भीड़ लगी है और सरकार ने ऐलान कर दिया है, कि अब हर परिवार को सिर्फ लिमिटेड पानी मिलेगा। सुनने में ये किसी हॉलीवुड फिल्म का सीन लगता है, लेकिन सच ये है कि दुनिया के कई शहर इस डरावने दौर के बेहद करीब पहुंच चुके हैं और सबसे खतरनाक बात भारत भी अब उसी रास्ते पर बढ़ रहा है।
नीति आयोग की रिपोर्ट-
नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्ध सप्लाई से लगभग दोगुनी हो सकती है। इतना ही नहीं, दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे 21 बड़े शहरों का Groundwater यानी भूजल लगभग खत्म होने की कगार पर पहुँच सकता है। यानी आने वाले कुछ सालों में करोड़ों लोगों के पास पीने तक का पानी नहीं बचेगा। लेकिन आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? भारत जैसा देश, जहाँ हर साल मानसून आता है, जहाँ इतनी बड़ी-बड़ी नदियाँ हैं… वहाँ पानी खत्म कैसे हो सकता है? आज की इस वीडियो में हम समझेंगे भारत के Water Crisis का पूरा सच, बेहद आसान भाषा में।
क्या होता है Day Zero?
सबसे पहले समझते हैं एक ऐसा शब्द जो आने वाले समय में दुनिया के सबसे डरावने शब्दों में से एक बन सकता है, “Day Zero”। Day Zero का मतलब होता है वो दिन जब किसी शहर के सारे प्राकृतिक पानी के स्रोत लगभग खत्म हो जाते हैं। नदियाँ सूख जाती हैं, झीलों में पानी नहीं बचता, और जमीन के नीचे मौजूद भूजल भी खत्म होने लगता है।
इसके बाद सरकार को घरों की पाइपलाइन सप्लाई बंद करनी पड़ती है और लोगों को पानी सिर्फ टैंकरों या राशन की तरह दिया जाता है। ये कोई काल्पनिक चीज नहीं है। साल 2018 में South Africa का Cape Town दुनिया का पहला बड़ा शहर बना जो Day Zero के बेहद करीब पहुँच गया था। वहाँ हालात इतने खराब हो गए थे कि लोगों को रोजाना सिर्फ कुछ लीटर पानी इस्तेमाल करने की अनुमति थी। लोग घंटों लाइन में खड़े रहते थे सिर्फ पानी भरने के लिए।
इस वीडियो के ज़रिए आप हालात को आसानी से समझ सकते हैं-
भारत में भी ऐसा खतरा सामने आ चुका है। 2019 में चेन्नई के चारों मुख्य जलाशय लगभग सूख गए थे। होटल बंद होने लगे, ऑफिसों में काम रुक गया, और लोग पानी के टैंकरों के पीछे भागते दिखाई दिए। कई जगह पानी चोरी तक होने लगी थी। उस समय पूरे देश ने देखा कि अगर पानी खत्म हो जाए तो एक आधुनिक शहर भी कुछ ही दिनों में कैसे ठप पड़ सकता है।
भारत का पानी जा कहां रहा है?
अब सवाल ये है, कि आखिर भारत का पानी जा कहां रहा है? इसका सबसे बड़ा जवाब है Groundwater यानी भूजल। जमीन के नीचे पानी की बड़ी-बड़ी परतें होती हैं, जिन्हें Aquifers कहा जाता है। जब बारिश होती है तो पानी धीरे-धीरे जमीन में जाता है और इन परतों को भरता रहता है। लेकिन समस्या तब शुरू होती है, जब हम जितना पानी जमीन से निकाल रहे हैं, उतना वापस जा ही नहीं रहा। भारत आज दुनिया में सबसे ज्यादा Groundwater इस्तेमाल करने वाला देश है। हम अमेरिका और चीन जैसे देशों से भी ज्यादा पानी जमीन के नीचे से खींच रहे हैं और सबसे चौंकाने वाली बात ये है, कि इस पानी का लगभग 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ खेती में इस्तेमाल होता है।
पानी की भारी कमी-
लोग सोचते हैं, कि पानी सिर्फ बड़ी फैक्ट्रियों या शहरों की वजह से खत्म हो रहा है, लेकिन असली कहानी खेती से जुड़ी हुई है।भारत में कई ऐसे राज्य हैं, जहां पानी की भारी कमी है, फिर भी वहां ऐसी फसलें उगाई जाती हैं जिन्हें बहुत ज्यादा पानी चाहिए। उदाहरण के लिए धान और गन्ना। एक किलो चावल उगाने में हजारों लीटर पानी लगता है। गन्ना भी पानी को बहुत तेजी से खींचता है। पंजाब, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में लगातार ऐसी फसलें उगाई जा रही हैं।
ऊपर से कई जगह किसानों को मुफ्त बिजली मिलती है, जिसकी वजह से Tube Wells और Borewells दिन-रात चलते रहते हैं। नतीजा ये हुआ कि जमीन के नीचे का Water Table लगातार नीचे जाता गया। कई इलाकों में अब पानी सैकड़ों फीट नीचे पहुंच चुका है। पहले जहां 20 या 30 फीट पर पानी मिल जाता था, अब 300 से 400 फीट तक बोरिंग करनी पड़ती है। सोचिए, अगर यही हाल रहा तो एक दिन ऐसा भी आ सकता है जब जमीन के नीचे से निकालने के लिए पानी बचेगा ही नहीं।
सिर्फ खेती ही जिम्मेदार नहीं-
लेकिन सिर्फ खेती ही जिम्मेदार नहीं है। हमारे शहर भी इस संकट को और तेजी से बढ़ा रहे हैं। पहले जब बारिश होती थी, तो पानी मिट्टी में चला जाता था और Groundwater Recharge होता रहता था। लेकिन अब शहरों में हर तरफ कंक्रीट ही कंक्रीट है। सड़कें, पार्किंग, बड़े-बड़े मॉल, इमारतें, बारिश का पानी जमीन में जाने के बजाय सीधे नालों में बह जाता है। यानी प्रकृति जिस तरीके से जमीन के नीचे पानी जमा करती थी, वो सिस्टम ही धीरे-धीरे खत्म हो गया।
बेंगलुरु इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। कभी इस शहर में 250 से ज्यादा झीलें थीं। लेकिन धीरे-धीरे अवैध निर्माण, कचरे और Urbanization की वजह से उनमें से ज्यादातर खत्म हो गईं। कुछ झीलें इतनी प्रदूषित हो चुकी हैं, कि उनमें झाग निकलता है और कई बार आग तक लग चुकी है। यही कारण है, कि आज बेंगलुरु जैसे शहर में लोग पानी के टैंकरों के लिए हजारों रुपए खर्च कर रहे हैं।
समुद्र के खारे पानी को मीठा-
अब बहुत लोग पूछते हैं. कि जब दूसरे देश टेक्नोलॉजी से पानी की समस्या हल कर सकते हैं तो भारत क्यों नहीं? उदाहरण के लिए Israel। अक्सर लोग कहते हैं, कि समुद्र के खारे पानी को मीठा क्यों नहीं बना लेते। इसे Desalination कहते हैं। Technology सच में मौजूद है और कई देश इसका इस्तेमाल भी करते हैं। लेकिन इसके पीछे एक बहुत बड़ी समस्या है, पैसा। समुद्र के पानी से नमक अलग करने में बहुत ज्यादा बिजली लगती है।
यानी ये प्रक्रिया बेहद महंगी होती है। भारत जैसे विशाल देश में अगर हर शहर के लिए ऐसा सिस्टम बनाया जाए तो पानी आम लोगों के लिए बहुत महंगा हो जाएगा। दूसरी समस्या है Geography। Desalination सिर्फ तटीय राज्यों के लिए काम आ सकता है। तमिलनाडु या गुजरात जैसे राज्यों में तो ये संभव है, लेकिन दिल्ली, पंजाब या मध्य प्रदेश जैसे Landlocked राज्यों तक समुद्र का पानी पहुंचाना लगभग असंभव और बहुत ज्यादा खर्चीला होगा।
पानी का प्रदूषण-
एक और चीज है जिसमें भारत बहुत पीछे है, Water Recycling। Israel अपने इस्तेमाल किए गए लगभग 90 प्रतिशत गंदे पानी को साफ करके दोबारा खेती में इस्तेमाल करता है। लेकिन भारत में स्थिति बिल्कुल उलटी है। यहां शहरों से निकलने वाले ज्यादातर Sewage Water को बिना साफ किए सीधे नदियों और झीलों में छोड़ दिया जाता है। यानी जो थोड़ा साफ पानी बचा है, हम उसे भी खुद प्रदूषित कर रहे हैं। यही कारण है, कि भारत की कई बड़ी नदियाँ आज गंदगी और केमिकल्स से भर चुकी हैं। कुछ शहरों में तो Groundwater तक प्रदूषित हो चुका है। यानी सिर्फ पानी की कमी ही नहीं, साफ पानी की कमी भी एक बहुत बड़ा संकट बनती जा रही है।
क्लाईमेट चेंज भी है कारण-
Climate Change भी इस पूरी समस्या को और खतरनाक बना रहा है। पहले बारिश का एक तय पैटर्न होता था। लेकिन अब कहीं अचानक बहुत ज्यादा बारिश हो जाती है, तो कहीं महीनों तक बारिश नहीं होती। Heavy Rainfall का सबसे बड़ा नुकसान ये है कि पानी जमीन में जाने के बजाय तेजी से बहकर निकल जाता है। दूसरी तरफ लंबे सूखे की वजह से Reservoirs और Dams सूखने लगते हैं। यानी एक तरफ बाढ़ बढ़ रही है और दूसरी तरफ पानी की कमी भी। यही वजह है कि आने वाले समय में Water Crisis सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बड़े-बड़े महानगर भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
खेती के तरीके बदलना-
अब सवाल आता है, कि अगर हालात इतने खराब हैं तो समाधान क्या है? क्या भारत सच में पानी खत्म कर देगा? जवाब है, अभी नहीं। लेकिन अगर हमने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो आने वाले साल बेहद मुश्किल हो सकते हैं। सबसे जरूरी चीज है Rainwater Harvesting। यानी बारिश के पानी को स्टोर करना और उसे जमीन के अंदर वापस भेजना। कई देशों और शहरों में ये सिस्टम अनिवार्य है। दूसरा समाधान है खेती के तरीके बदलना। ऐसी फसलें उगानी होंगी जिन्हें कम पानी चाहिए। Drip Irrigation जैसी तकनीकें इस्तेमाल करनी होंगी ताकि पानी की बर्बादी कम हो। तीसरी सबसे जरूरी चीज है Water Recycling। अगर भारत अपने Sewage Water का बड़ा हिस्सा साफ करके दोबारा इस्तेमाल करना शुरू कर दे, तो काफी हद तक पानी बचाया जा सकता है।
समस्या सिर्फ सरकार नहीं-
लेकिन सच कहें तो सबसे बड़ी समस्या सिर्फ सरकार नहीं है, बल्कि हमारी आदतें भी हैं। हम अक्सर पानी को Unlimited Resource समझ लेते हैं। नल खुला छोड़ देना, जरूरत से ज्यादा पानी बहाना, छोटी-छोटी चीजों में पानी बर्बाद करना, ये सब मिलकर बहुत बड़ा नुकसान करते हैं। आज अगर किसी शहर में पानी भरपूर है, तो इसका मतलब ये नहीं, कि वहां हमेशा रहेगा। Cape Town और Chennai जैसे शहर भी कभी यही सोचते थे।
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Experts का मानना है, कि 2030 तक भारत की लगभग 40 प्रतिशत आबादी के पास पीने के साफ पानी का कोई स्थायी स्रोत नहीं बचेगा। सोचिए करोड़ों लोग ऐसे होंगे, जिन्हें हर दिन सिर्फ पानी के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। शायद उस दिन हमें एहसास होगा कि पानी सिर्फ एक साधारण Resource नहीं था, बल्कि पूरी जिंदगी की नींव था। क्योंकि जब बिजली चली जाती है तो हम कुछ घंटों तक काम चला सकते हैं, इंटरनेट बंद हो जाए, तो भी जिंदगी चलती रहती है, लेकिन अगर पानी खत्म हो जाए, तो सभ्यता कुछ ही दिनों में रुक सकती है। इसलिए सवाल ये नहीं है कि भारत का पानी कब खत्म होगा, असली सवाल ये है, कि क्या हम उसके खत्म होने से पहले संभल पाएंगे?”
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