War Impact on Historical Heritage: ईरान में जारी युद्ध का असर अब सिर्फ इंसानी जान-माल और अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका गहरा प्रभाव देश की सांस्कृतिक विरासत पर भी पड़ रहा है। हालिया हमलों में कई ऐतिहासिक इमारतें, संग्रहालय और धरोहर स्थल प्रभावित हुए हैं। यह खबर उन लोगों के लिए भी चिंता का विषय है, जो इतिहास और कला को सिर्फ अतीत नहीं, बल्कि पहचान मानते हैं।
140 से ज्यादा ऐतिहासिक स्थलों पर असर-
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक पूरे ईरान में 140 से अधिक ऐतिहासिक स्थलों को नुकसान पहुंचा है। तेहरान में ही 77 साइट्स प्रभावित हुई हैं, जिनमें से 38 को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा मिला हुआ है। अधिकारियों का कहना है, कि करीब 90 प्रतिशत जगहों को मामूली नुकसान हुआ है, लेकिन बाकी 10 प्रतिशत साइट्स को गंभीर क्षति झेलनी पड़ी है। हालांकि राहत की बात यह है, कि ज्यादातर नुकसान इमारतों के बाहरी हिस्सों तक सीमित है, जबकि अंदर रखी कलाकृतियां और संग्रह अभी सुरक्षित हैं।
UNESCO की चिंता और अपील-
इस पूरे मामले पर UNESCO ने भी गहरी चिंता जताई है। संगठन ने पहले ही सभी पक्षों से अपील की थी, कि वे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को किसी भी तरह के हमले से बचाएं। World Heritage Centre के निदेशक ने साफ कहा, कि युद्ध का असर अब विश्व धरोहर स्थलों तक पहुंच रहा है, जो पूरी मानवता के लिए खतरे की घंटी है।
गोलस्तान पैलेस पर खतरा-
ईरान की राजधानी तेहरान में स्थित Golestan Palace, जो देश की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित इमारतों में गिना जाता है, भी इस संघर्ष की चपेट में आया है। काजार वंश के दौर में बने इस महल को अक्सर यूरोप के वर्साय से तुलना की जाती है। इस पर हुए हमलों ने ईरान की सांस्कृतिक विरासत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस्फहान के ऐतिहासिक स्थलों को नुकसान-
युद्ध के दूसरे हफ्ते में इस्फहान शहर भी हमलों का निशाना बना। यहां स्थित Chehel Sotoun Palace को पास में हुए धमाकों और मिसाइल के मलबे से नुकसान पहुंचा। इसी तरह Ali Qapu Palace और Masjed-e Jameh भी धमाकों की लहरों से प्रभावित हुए। खासकर मस्जिद की खूबसूरत फिरोजी टाइल्स को काफी नुकसान हुआ, जो इसकी पहचान मानी जाती थीं।
खोर्रमाबाद में किले और प्राचीन गुफाएं प्रभावित-
लोरेस्तान प्रांत के खोर्रमाबाद शहर में स्थित Falak-ol-Aflak Castle भी हमलों से अछूता नहीं रहा। किले के आसपास हुए हमले में इसके अंदर मौजूद संग्रहालय और प्रशासनिक कार्यालय प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा, हजारों साल पुराने प्रागैतिहासिक गुफाओं और शैलाश्रयों को भी नुकसान पहुंचा है, जो मानव सभ्यता के शुरुआती प्रमाण माने जाते हैं।
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सांस्कृतिक विरासत पर बढ़ता खतरा-
यह घटनाएं दिखाती हैं, कि युद्ध सिर्फ वर्तमान को ही नहीं, बल्कि इतिहास को भी मिटाने की ताकत रखता है। जब धरोहर स्थल नष्ट होते हैं, तो सिर्फ इमारतें नहीं गिरतीं, बल्कि एक पूरी संस्कृति और पहचान खतरे में आ जाती है। यही कारण है, कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन हमलों की आलोचना हो रही है और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा की मांग तेज हो गई है।
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