Harekala Hajabba
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    Harekala Hajabba: कर्नाटक के मंगलुरु के एक बस स्टैंड पर संतरे बेचने वाले एक साधारण इंसान की जिंदगी एक छोटी-सी घटना से हमेशा के लिए बदल गई। Harekala Hajabba नाम के इस शख्स से कुछ विदेशी पर्यटकों ने संतरे की कीमत पूछी, लेकिन वह उनकी भाषा समझ नहीं पाए। उन्हें अपना काम तो आता था, लेकिन शब्दों की कमी ने उन्हें उस दिन असहज कर दिया। यही एक पल था, जिसने उनके अंदर कुछ बड़ा करने की आग जगा दी।

    पढ़ाई की कमी बनी सबसे बड़ी सीख-

    Harekala Hajabba कभी स्कूल नहीं गए थे। न पढ़ना आता था, न लिखना। बस स्टैंड पर हुई उस घटना ने उन्हें यह एहसास दिलाया, कि शिक्षा कितनी जरूरी है। इसी के साथ एक और सच्चाई सामने आई, उनके गांव में कोई स्कूल ही नहीं था। यह बात उनके दिल को छू गई और उन्होंने ठान लिया, कि गांव के बच्चों को वह इस कमी का सामना नहीं करने देंगे।

    संतरे बेचकर बनाया स्कूल-

    साल 2000 में Harekala Hajabba ने अपने छोटे-छोटे बचत से स्कूल बनाने की शुरुआत की। यह सफर आसान नहीं था। उन्होंने धीरे-धीरे पैसे जमा किए, कर्ज लिया, जमीन खरीदी और लोगों से मदद भी मांगी। सालों की मेहनत और संघर्ष के बाद एक छोटा प्रयास एक सरकारी स्कूल में बदल गया। आज इस स्कूल में 2000 से ज्यादा बच्चे पढ़ चुके हैं। यह किसी चमत्कार से कम नहीं है।

    सादगी भरी जिंदगी, बड़ा सपना-

    स्कूल बनाने के बाद भी Harekala Hajabba ने अपना काम नहीं छोड़ा। वह संतरे बेचते रहे और साधारण जीवन जीते रहे। उनकी यही सादगी और समर्पण उनकी कहानी को और भी खास बनाती है। वह कभी चर्चा में आने के लिए नहीं, बल्कि अपने गांव के बच्चों के भविष्य के लिए काम करते रहे।

    देश ने किया सम्मान-

    उनकी इस मेहनत और समाज सेवा को देश ने भी पहचाना। साल 2020 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया और नवंबर 2021 में उन्हें यह सम्मान मिला। खास बात यह रही, कि जब उन्हें इस पुरस्कार की जानकारी मिली, तब वह राशन की दुकान की लाइन में खड़े थे।

    अभी भी जारी है मिशन-

    आज भी Harekala Hajabba का मिशन खत्म नहीं हुआ है। उनका स्कूल लगातार आगे बढ़ रहा है। 2024 में स्कूल को बाइलिंगुअल क्लास शुरू करने की अनुमति मिली और नए एडमिशन भी हुए। हालांकि, अभी भी कई चुनौतियां बाकी हैं। 2025 तक प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज बनाने की योजना फंड की कमी के कारण अधूरी है और क्लासेस सीमित जगह में चल रही हैं।

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    एक छोटी घटना, बड़ा बदलाव-

    Harekala Hajabba की कहानी हमें यह सिखाती है, कि जिंदगी में कोई भी छोटा अनुभव बड़ा बदलाव ला सकता है। अगर इरादा मजबूत हो, तो एक संतरे बेचने वाला व्यक्ति भी हजारों बच्चों की जिंदगी रोशन कर सकता है।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।