Payal Nag: ओडिशा के बालांगीर में एक राजमिस्त्री का घर। आठ साल की बच्ची ईंट-भट्टे पर खेल रही थी। अचानक बिजली का करंट लगा और एक पल में ज़िंदगी बदल गई। दोनों हाथ गए, दोनों पैर भी। लेकिन उस बच्ची का हौसला नहीं गया। आज 18 साल की पायल नाग बैंकॉक में दुनिया की नंबर एक तीरंदाज़ को हराकर स्वर्ण पदक जीत चुकी है और पूरा देश उसे सलाम कर रहा है।
कौन हैं पायल नाग?
पायल नाग ओडिशा के बालांगीर ज़िले की रहने वाली हैं। 8 साल की उम्र में ईंट-भट्टे पर बिजली का करंट लगने से उन्होंने अपने चारों अंग खो दिए। एक दैनिक मज़दूर की बेटी के लिए यह त्रासदी किसी के लिए भी तोड़ देने वाली होती। लेकिन पायल ने हार नहीं मानी। वो मुंह से पेंटिंग बनाने लगीं और उनकी इसी अद्भुत एकाग्रता ने उनकी ज़िंदगी बदल दी।
Payal Nag.
— anand mahindra (@anandmahindra) April 6, 2026
Daughter of a daily-wage mason from Odisha.
Electrocuted at the age of eight. Lost all four limbs.
And then, found a bow.
Spotted through her paintings by coach Kuldeep Vedwan, the same man who shaped world champion Sheetal Devi.
Defeated her idol Sheetal Devi at… pic.twitter.com/KdWGcuAJ9X
कोच की एक नज़र ने बदल दी किस्मत-
Paralympic पदक विजेता शीतल देवी के कोच कुलदीप वेदवान ने जब पायल को मुंह से जटिल चित्र बनाते देखा, तो उन्हें एक चैंपियन की झलक दिखी। उन्होंने पायल को 2023 में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड तीरंदाजी अकादमी, कटरा में लाया। वहां से शुरू हुई एक ऐसी यात्रा जिसने इतिहास बदल दिया। पायल ने एक कस्टम-निर्मित कृत्रिम पैर से धनुष को स्थिर रखना और मुंह से चेस्ट-रिलिज़ सिस्टम चलाकर तीर छोड़ना सीखा, यह तकनीक दुनिया में पहले किसी ने नहीं अपनाई।
बैंकॉक में लिखी नई इबारत-
बैंकॉक में वर्ल्ड पैरा आर्चरी सिरिज़ का फाइनल एक काव्यात्मक मुकाबला था। पायल के सामने थीं खुद उनकी आदर्श विश्व नंबर एक शीतल देवी। उस तनाव भरे मुकाबले में पायल ने 139-136 से जीत हासिल की और इंजिविज़ुअल कंपाउंड गोल्ड अपने नाम किया। इससे पहले दोनों दिल की बहनों ने मिलकर डबल गोल्ड भी जीता। भारत ने इस टूर्नामेंट में 7 स्वर्ण पदक जीतकर पदक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया।
आनंद महिंद्रा हुए भावुक-
जब यह खबर फैली तो देश के जाने-माने उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने X पर एक भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, “पायल नाग। ओडिशा के एक दैनिक मज़दूर राजमिस्त्री की बेटी। आठ साल की उम्र में करंट लगा। चारों अंग गए और फिर उसने धनुष उठाया।” उन्होंने कहा, कि जब भी वो उदास होते हैं तो पायल और शीतल को देखते हैं और समझते हैं, कि असली हिम्मत क्या होती है।
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2028 Paralympic की तैयारी शुरू-
कोच कुलदीप वेदवान का मानना है, कि यह सिर्फ शुरुआत है। तीन साल से भी कम समय में अपनी अनोखी तकनीक में महारत हासिल कर चुकी पायल को अब 2026 पैरा एशियाई खेलों और 2028 लॉस एंजलस पैरालम्पिक्स के लिए तैयार किया जा रहा है। पायल की कहानी साबित करती है, कि सीमाएं तभी होती हैं, जब आप उन्हें मानते हैं।
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