Chaitra Navratri 2026: आज से चैत्र नवरात्रि के पावन दिन शुरू हो गए हैं। यह वो नौ दिन होते हैं, जब पूरे देश में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। घरों में दीये जलते हैं, मंदिरों में घंटियां बजती हैं और हवा में भक्ति का रंग घुल जाता है। नवरात्रि सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि यह आत्मा को ऊर्जा से भरने का वो मौका है, जो साल में दो बार आता है। इन नौ दिनों में दुर्गा चालीसा का पाठ करना बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है।
क्या है दुर्गा चालीसा और क्यों है इतनी खास?
दुर्गा चालीसा मां दुर्गा को समर्पित एक भक्तिमय स्तुति है, जिसमें उनकी शक्ति और करुणा का वर्णन है। इसके हर छंद में एक संदेश है, समर्पण का, विश्वास का और उस अदृश्य शक्ति का, जो हमें हर मुश्किल में थामे रखती है। नवरात्रि के दिनों में जब आध्यात्मिक ऊर्जा अपने चरम पर होती है, तब दुर्गा चालीसा का पाठ मां से गहरा जुड़ाव बनाता है। कई भक्तों का मानना है, कि नियमित पाठ से नकारात्मक विचारों और बुरी शक्तियों से एक सुरक्षा कवच बनता है।
मन को भी मिलती है शांति-
दुर्गा चालीसा का पाठ सिर्फ आस्था तक सीमित नहीं है, इसके मानसिक फायदे भी हैं, जो विज्ञान भी मानता है। कई शोध बताते हैं, कि लय में किया गया जाप मन को एकाग्र करता है और तनाव कम करता है। दुर्गा चालीसा की लयबद्ध पंक्तियां और उनमें निहित भक्ति भाव मिलकर एक ऐसी मानसिक अवस्था बनाते हैं. जिसमें चिंता और बेचैनी कम होती है। भक्त बताते हैं, कि पाठ के बाद जो सुकून मिलता है, वो किसी दवा से नहीं मिलता। जीवन की भागदौड़ में यह पाठ एक ठहराव देता है, खुद से और मां से मिलने का।
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पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की उपासना की जाती है। पूजा के लिए लकड़ी के पाटे पर लाल कपड़ा बिछाएं और मां शैलपुत्री की तस्वीर स्थापित करें। कपड़े पर केसर से “श्रीं” लिखें और उस पर मनोकामना पूर्ति गुटिका रखें। हाथ में लाल फूल लेकर मां का ध्यान करें और मंत्र जपते हुए फूल और गुटिका मां की तस्वीर पर अर्पित करें। इसके बाद प्रसाद चढ़ाएं और मां शैलपुत्री के मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
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