Atal Canteen
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    Atal Canteen: मजदूर मंगलवार की सुबह से बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। पिछले दो दिनों से उनकी जन्नत बंद पड़ी थी, वो अटल कैंटीन जहां सिर्फ 5 रुपये में पेट भर खाना मिलता है। जब मंगलवार को कैंटीन का दरवाजा खुला, तो सबके चेहरे पर जो राहत थी, वो बयान से बाहर थी। पास के निर्माण स्थल पर काम करने वाले सैकड़ों मजदूरों के लिए यह कैंटीन महज एक ढाबा नहीं, यह उनके परिवार चलाने का सहारा है। लेकिन मंगलवार के पहले खाने में सिर्फ दाल, चावल और रोटी थी, सब्जी नहीं थी।

    खुली कैंटीन लेकिन थाली में सब्जी नहीं-

    अंग्रेज़ी समाचार वेबसाइट द् प्रिंट के मुताबिक, दो दिन की बंदी के बाद जब कैंटीन खुली तो राहत तो मिली लेकिन पूरी नहीं। मंगलवार के पहले खाने में केवल दाल, चावल और रोटी परोसी गई, सब्जी यानी साइड डिश थाली से गायब थी। यह उस वादे से अलग था. जो अटल कैंटीन शुरू करते वक्त किया गया था। हालांकि मजदूरों ने बिना शिकायत के यह अधूरी थाली भी खुशी से खाई, क्योंकि दो दिन से भटकने के बाद यह भी किसी नियामत से कम नहीं लगी।

    बंद क्यों हुई कैंटीन-

    दक्षिण दिल्ली की एक अटल कैंटीन के दरवाजे पर सोमवार को हाथ से लिखी एक पर्ची लगाई गई थी, जिसमें लिखा था, कि गैस आने तक कैंटीन बंद रहेगी। नेहरू नगर अटल कैंटीन के कर्मचारी ने बताया, कि LPG की कमी की वजह से खाना नहीं आया। लेकिन खाना आपूर्ति करने वाली कंपनी Sanraj Hospitality के प्रबंधक मुकेश शर्मा ने इसे “तकनीकी समस्या” बताया और कहा, कि बोरवेल में पानी की दिक्कत आई थी, जिससे रसोई दो दिन बंद रही। उन्होंने भरोसा दिलाया, कि रात के खाने से दाल, चावल, रोटी, सब्जी और अचार सब कुछ फिर से मिलने लगेगा।

    5 रुपये की थाली-

    अटल कैंटीन की शुरुआत 25 दिसंबर को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर की थी। इसमें दिन में दो बार सिर्फ 5 रुपये में भरपेट खाना देने का वादा किया गया था, दोपहर 12 से 2 बजे और शाम 6 से साढ़े 8 बजे तक। शुरुआत में RK पुरम, गोविंदपुरी, नरेला, बवाना और राजौरी गार्डन समेत कम आमदनी वाले इलाकों में 45 कैंटीन खुलीं। दिल्ली सरकार का लक्ष्य 100 कैंटीन खोलने का है।

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    लकड़ी जलाकर खाना पकाने की नौबत-

    लाजपत नगर में ढोलकी बजाने वाले राजू और उनकी टीम इस कैंटीन में दोनों वक्त का खाना खाते हैं। जब कैंटीन बंद हुई, तो उन्हें पास से लकड़ी इकट्ठा करके पूरी टीम के लिए खाना पकाना पड़ा। मंगलवार को जैसे ही कैंटीन खुली राजू सीधे वहां पहुंच गए। कैंटीन के दोबारा खुलते ही 200 से 300 लोग खाना खाने पहुंच गए और उन सबके चेहरे पर एक ही भाव था, राहत।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।