Indian LPG Strait of Hormuz
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    Indian LPG Strait of Hormuz: दुनिया की सबसे बड़ी मुसीबतें अक्सर चुपचाप सुलझती हैं। कोई बड़ी घोषणा नहीं, कोई शोर नहीं बस कुछ जरूरी फोन कॉल और कुछ अहम फैसले। हाल ही में कुछ ऐसा ही हुआ जब ईरान ने दो भारतीय LPG जहाजों को होर्मुज जलसंधि से गुजरने की इजाजत दी। ऊपर से देखने पर यह एक आम बात लगती है, लेकिन असल में इस एक फैसले ने भारत में एक बड़े रसोई गैस संकट को टाल दिया।

    वो समुद्री रास्ता जिसे दुनिया अक्सर नजरअंदाज करती है-

    नक्शे पर होर्मुज जलसंधि एक छोटी सी पट्टी लगती है, लेकिन यह दुनिया के सबसे जरूरी ऊर्जा मार्गों में से एक है। मध्य पूर्व से तेल और LPG लेकर चलने वाले हर बड़े जहाज को इसी रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। जब इस इलाके में तनाव बढ़ता है, तो इस संकरे रास्ते पर थोड़ी सी भी रुकावट पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को हिला सकती है। यही वजह है, कि सिर्फ दो भारतीय जहाजों का इस रास्ते से गुजरना अचानक एक बड़ी कूटनीतिक और ऊर्जा सुरक्षा की खबर बन गई।

    अगर रुक जाते ये जहाज तो क्या होता?

    भारत में LPG सिर्फ एक ईंधन नहीं है, यह करोड़ों परिवारों की रसोई की जान है। अगर इन जहाजों में देरी होती या इन्हें रोक दिया जाता, तो इसका असर कुछ ही दिनों में बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक महसूस होता। गैस सिलेंडर की कमी और बढ़ती कीमतें यही डर था, जो ऊर्जा अधिकारियों को रात को सोने नहीं दे रहा था। सबकी नजरें उन दो जहाजों पर टिकी थीं, जो जलसंधि के पास इंतजार कर रहे थे।

    वो एक फोन कॉल जिसने सब बदल दिया-

    जहाजों को रास्ता मिलने से कुछ घंटे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से बात की। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली बातचीत थी। सूत्रों के मुताबिक, इस बातचीत में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और गैस आपूर्ति को बिना रुकावट जारी रखने पर जोर दिया गया। और बातचीत के कुछ ही देर बाद ईरान ने पुष्टि कर दी कि भारतीय जहाज अपना सफर जारी रख सकते हैं।

    वो दोस्ती जो मुश्किल वक्त में काम आई-

    भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतेही ने दोनों देशों को ऐसे दोस्त बताया, जिनके हित एक-दूसरे से जुड़े हैं। उन्होंने कहा, कि भारत ने मुश्किल दौर में ईरान का साथ दिया है और दोनों देशों के बीच सहयोग आज भी मजबूत है। दशकों से बने रिश्ते संकट के वक्त ही अपनी असली ताकत दिखाते हैं और इस बार भी यही हुआ।

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    दो जहाज, लेकिन मतलब बहुत बड़ा-

    विश्व व्यापार में दो जहाज भले ही मामूली लगें, लेकिन तनाव के इस दौर में LPG लेकर चलते ये जहाज अहम थे। इनके गुजरने से न सिर्फ आपूर्ति बनी रही, बल्कि यह संदेश भी गया, कि होर्मुज जलसंधि से व्यापार अभी भी जारी है। भारत के लिए इसका मतलब था, तत्काल गैस संकट से बचाव और घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता में स्थिरता। आपके घर पहुंचने वाला गैस सिलेंडर एक लंबी और जटिल यात्रा तय करके आता है और कभी-कभी उस यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए दो देशों के नेताओं के बीच बस एक जरूरी बातचीत काफी होती है।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।