IRIS Dena India
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    IRIS Dena India: 4 फरवरी के दिन पूरा भारत होली के रंगों में डूबा था और उसी दिन हिंद महासागर में एक ऐसी घटना हुई, जिसने दिल्ली के सियासी और सामरिक गलियारों में हलचल मचा दी। एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को टॉरपीडो से डुबो दिया। इस हमले में 80 से ज़्यादा नाविक मारे गए और 100 से अधिक लापता हो गए। जो बात इस घटना को भारत के लिए और भी संवेदनशील बनाती है, वो यह है, कि यह जहाज़ भारतीय नौसेना के अभ्यास में हिस्सा लेकर वापस लौट रहा था।

    भारत आया था IRIS Dena, लौटते वक्त हुआ हमला-

    IRIS Dena ईरानी नौसेना का एक युद्धपोत था, जो 16 फरवरी को विशाखापत्तनम पहुंचा था। यहां उसने भारतीय नौसेना के अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा और बहुराष्ट्रीय अभ्यास मिलन-2026 में हिस्सा लिया। करीब 74 देशों ने इस अभ्यास में भाग लिया। अमेरिका इसमें शामिल नहीं था, उसका युद्धपोत आखिरी वक्त पर पीछे हट गया।

    25 फरवरी को अभ्यास समाप्त हुआ और तीन दिन बाद अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला कर दिया। 4 फरवरी को श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास IRIS Dena पर हमला हुआ। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेग्सेथ ने बेशर्मी से कहा, “एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी जहाज़ को टॉरपीडो से डुबोया। शांत मौत।”

    भारत चुप, विपक्ष हमलावर-

    यह घटना उस इलाके में हुई, जो प्रधानमंत्री मोदी के महासागर विज़न का हिस्सा है, जिसमें भारत को हिंद महासागर में स्थिरता का स्तंभ माना गया है। लेकिन सरकार ने इस पर चुप्पी साध ली। इस चुप्पी ने विपक्ष को हमला करने का मौका दे दिया। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “पीएम मोदी की यह कमज़ोरी देश को शर्मसार कर रही है। हमारी क्षेत्रीय ताकत कहां गई? पूर्व सांसद जवाहर सिरकार ने भी सवाल उठाया, कि भारत इतना बेबस कैसे हो गया, कि जो जहाज़ यहां से अभ्यास करके लौटा, उसे डुबोते देखता रहा।

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    तो क्या सच में भारत ज़िम्मेदार है?

    यह सबसे ज़रूरी सवाल है। रक्षा विशेषज्ञ संदीप उन्नीथन ने साफ कहा, “यह हमारी गलती नहीं है। किसी भी जहाज़ के आने-जाने के बाद क्या होता है, भारत इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं है। ईरानी चालक दल ने न कोई मदद मांगी, न सुरक्षा।” लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे ने भी कहा, कि जैसे ही जहाज़ भारतीय समुद्री सीमा से बाहर निकला, भारत की ज़िम्मेदारी खत्म हो गई। IRIS Dena अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में था और उसके कप्तान को पता था, कि ईरान युद्ध में है, वो चाहते तो भारतीय बंदरगाह में शरण मांग सकते थे।

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    तथ्य साफ हैं, भारत इस घटना के लिए ज़िम्मेदार नहीं है। लेकिन यह घटना यह ज़रूर बताती है, कि अमेरिका-ईरान जंग अब सिर्फ खाड़ी तक सीमित नहीं रही, वो भारत के दरवाज़े तक आ पहुंची है।

    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।