Swachh Bharat Mission
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    Swachh Bharat Mission: गुजरात के वडोदरा शहर में एक ऐसा प्रयोग शुरू हुआ है, जिसने साबित कर दिया, कि जागरूकता से ज्यादा जरूरी है सख्ती। स्वच्छ भारत अभियान के तहत सालों से लाखों रुपये खर्च करके लगाए गए पोस्टर और होर्डिंग्स जो काम नहीं कर पाए, वो काम अब महज ₹1800 के CCTV कैमरे ने कर दिखाया है। वडोदरा म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की यह पहल पूरे देश के लिए मिसाल बनती जा रही है।

    CCTV की नजर से बच नहीं पाएगा कोई-

    वडोदरा म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने शहर भर में सार्वजनिक स्थानों पर CCTV कैमरे लगवाए हैं। अब जो भी व्यक्ति सड़कों पर कचरा फेंकता है या सार्वजनिक जगहों पर गंदगी फैलाता है, उसकी तस्वीर कैमरे में कैद हो जाती है। इसके बाद नगर निगम के सभी सरकारी बोर्ड्स पर उस व्यक्ति की फोटो लगा दी जाती है। यह शर्मिंदगी किसी भी जुर्माने से बड़ी साबित हो रही है।

    चाहे कोई बड़ा बिजनेसमैन हो या छोटा दुकानदार, कबाड़ी हो या ठेलेवाला, सबके साथ एक जैसा व्यवहार किया जा रहा है। 4K क्वालिटी में कैप्चर की गई तस्वीरें इतनी साफ होती हैं, कि चेहरा छुपाना नामुमकिन हो जाता है। पब्लिक शेमिंग का यह तरीका इतना कारगर साबित हुआ है, कि लोग अब दो बार सोचने लगे हैं।

    प्राइवेसी का सवाल उठा तो सरकार ने दिया जवाब-

    जैसे ही यह अभियान शुरू हुआ, कुछ लोगों ने प्राइवेसी का मुद्दा उठाया। लोगों का कहना था, कि बिना इजाजत के किसी की भी फोटो खींचकर सार्वजनिक करना गलत है। लेकिन सरकार का जवाब स्पष्ट और तार्किक था। अधिकारियों ने समझाया, कि सड़कें और सार्वजनिक स्थान पब्लिक प्रॉपर्टी हैं, जो हर नागरिक की हैं। अपने घर में, अपनी निजी संपत्ति पर आप जो चाहे करें, लेकिन सार्वजनिक जगहों पर गंदगी फैलाने का कोई अधिकार नहीं है।

    सरकार का कहना है, कि जब आप पब्लिक प्रॉपर्टी को गंदा करते हैं, तो प्राइवेसी का कोई सवाल ही नहीं बनता। यह बात सुनने में भले ही सख्त लगे, लेकिन है बिल्कुल सही।

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    ₹1000 का जुर्माना और करोड़ों की कमाई की संभावना-

    वडोदरा में गंदगी फैलाने पर ₹1000 का जुर्माना लगाया जा रहा है। अगर यह नियम पूरे भारत में लागू हो जाए, तो सरकार को हजारों करोड़ की अतिरिक्त आय हो सकती है। भारत में हर दिन अवैध तरीके से इतना कचरा फेंका जाता है. कि अगर इस पर सही से अमल हो तो सरकारी खजाने में 5000 से 10000 करोड़ रुपये आसानी से जुड़ सकते हैं।

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    लेकिन असली मकसद पैसे कमाना नहीं, बल्कि लोगों की सोच बदलना है। यह छोटा सा कदम साबित कर रहा है, कि तकनीक का सही इस्तेमाल समाज में बदलाव ला सकता है। वडोदरा की यह पहल अब दूसरे शहरों के लिए भी प्रेरणा बन रही है।

    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।