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    Viral Video: तिरुनेलवेली में आज एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई, जब सफाई कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की फ्री मील स्कीम के तहत मिलने वाले खाने को कचरे के डिब्बे में फेंक दिया। इस विरोध प्रदर्शन के जरिये कर्मचारियों ने साफ कर दिया, कि वह अब इस तरह का घटिया खाना बर्दाश्त नहीं करेंगे। उनका आरोप है, कि नवंबर 2025 में जब से इस योजना का विस्तार हुआ है, तब से उन्हें परोसे जा रहे खाने की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है।

    सेहत से खिलवाड़ की शिकायतें-

    सफाई कर्मचारियों ने बताया, कि इस सरकारी खाने को खाने के बाद उन्हें पेट दर्द और उल्टी जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई कर्मचारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, कि यह खाना खाने लायक ही नहीं है। जो योजना उनकी सेहत और पोषण के लिए शुरू की गई थी, वही अब उनकी परेशानी की वजह बन गई है। इस स्थिति ने कर्मचारियों के गुस्से को और भड़का दिया है।

    “हम खाने के गुलाम नहीं हैं”-

    विरोध प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने जोरदार नारेबाजी की और कहा, कि उन्हें खैरात में खराब खाना नहीं, बल्कि अपने हक की सही मजदूरी चाहिए। एक कर्मचारी ने गुस्से में कहा, “जब हम अपनी उचित मजदूरी की मांग करते हैं, तो सरकार हमें इस तरह का घटिया खाना थमा देती है। हम खाने के गुलाम नहीं हैं, हमें हमारा हक चाहिए।” यह नारा पूरे तिरुनेलवेली में गूंज उठा और सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया।

    योजना की शुरुआत और वादे-

    मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने यह फ्री मील स्कीम नवंबर 2025 में चेन्नई से शुरू की थी। इसके बाद 6 दिसंबर 2025 को इसे तिरुनेलवेली सहित पूरे तमिलनाडु में लागू कर दिया गया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सुबह जल्दी काम पर लगने वाले सफाई कर्मचारियों को पौष्टिक नाश्ता और दोपहर का खाना उपलब्ध कराना था। सरकार ने दावा किया था कि प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स और हाई क्वालिटी कैटरिंग एजेंसियां इस खाने की निगरानी करेंगी।

    निगरानी में नाकामी-

    हालांकि सरकारी दावों के बावजूद तिरुनेलवेली में आज जो कुछ हुआ, उसने इन सभी वादों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जिस मॉनिटरिंग सिस्टम की बात की गई थी, वह जमीनी स्तर पर कहीं नजर नहीं आया। कर्मचारियों का कहना है, कि न तो कोई क्वालिटी चैक होता है और न ही उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता है।

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    पुरानी समस्याओं में नई चिंगारी-

    तिरुनेलवेली में सफाई कर्मचारी पहले से ही प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर्स के खिलाफ और परमानेंट नौकरी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। आज की यह खराब क्वालिटी वाले खाने की घटना ने उनके गुस्से में घी का काम किया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियोज में साफ दिख रहा है, कि कर्मचारी किस तरह खाने को डस्टबिन में फेंक रहे हैं।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।