Supreme Court on Stray Dogs
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    Supreme Court on Stray Dogs: मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के अटैक से जुड़े एक केस की सुनवाई के दौरान बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए, यह सवाल उठाया, कि जब सड़कों पर घूमने वाले आवारा कुत्तों से बच्चों और बुजुर्गों की मौत होती है या वे घायल होते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होनी चाहिए। नौ साल के एक मासूम बच्चे की मौत का जिक्र करते हुए कोर्ट ने करारे सवाल किए, जिन्होंने पूरे देश का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर खींच लिया है।

    बच्चे की मौत पर कोर्ट का सवाल-

    बेंच ने पूछा. कि जब डॉग लवर्स ऑर्गनाइजेशन द्वारा खिलाए जा रहे, आवारा कुत्तों से किसी नौ साल के बच्चे की मौत हो जाती है, तो इसके लिए जिम्मेदार किसे ठहराया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी सवाल किया, कि क्या उसे अपनी आंखें बंद कर लेनी चाहिए और चीजों को होने देना चाहिए। बेंच ने टिप्पणी की, कि इमोशंस सिर्फ कुत्तों के लिए ही दिखाई देते हैं, जबकि इंसानों पर हमलों की घटनाएं अक्सर उसी तरह की अर्जेंसी पैदा करने में फेल हो जाती हैं।

    कोर्ट ने संकेत दिया, कि वह एकाउंटेबिलिटी के लिए एक सख्त फ्रेमवर्क तैयार करने पर विचार कर रहा है। बेंच ने कहा, कि डॉग बाइट से मौत और चोट के मामलों में राज्य सरकार को भारी कंपनसेशन देना होगा। साथ ही डॉग लवर्स और उनका रिप्रेजेंट करने वाली ऑर्गनाइजेशन्स पर भी लायबिलिटी और एकाउंटेबिलिटी फिक्स की जाएगी।

    घर में खिलाओ तो खिलाओ-

    बेंच ने आगे कहा, कि अगर लोग कुत्तों को खिलाना या उनकी देखभाल करना चाहते हैं, तो उन्हें अपने प्रिमाइसेज के अंदर ऐसा करना चाहिए। कोर्ट ने कहा, कि या तो उन्हें अपने कंपाउंड में रखो, अपने घर में रखो, अपने घर में खिलाओ। उन्हें इधर उधर घूमने और परेशानी पैदा करने की इजाजत क्यों दी जानी चाहिए। यह टिप्पणी उन डॉग लवर्स के लिए एक सख्त मैसेज है, जो पब्लिक प्लेसेज पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाते हैं।

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    सेंटर और स्टेट्स से सीरियस सवाल-

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी, कि जब वह केंद्र और राज्य सरकारों को इस मुद्दे पर सुनेगा, तो सीरियस सवाल उठाएगा। कोर्ट ने याद दिलाया. कि पिछली सुनवाई के दौरान उसने कुत्तों के प्रति क्रूरता दिखाने वाले वीडियोज देखने से इनकार कर दिया था। साथ ही यह भी नोट किया था, कि बच्चों और बुजुर्गों पर अटैक करते कुत्तों के भी वीडियोज हैं।

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    कोर्ट ने पहले कहा था, कि हमें यहां कोई कंपटीशन नहीं चाहिए। यह अंडरलाइन करते हुए कि एनिमल वेलफेयर की बहस में पब्लिक सेफ्टी को साइडलाइन नहीं किया जा सकता। अब यह देखना होगा, कि कोर्ट कैसा फ्रेमवर्क तैयार करता है, जो इंसानों की सुरक्षा और जानवरों के अधिकार दोनों के बीच बैलेंस बना सके।