JEE NEET Exam Changes
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    JEE NEET Exam Changes: देश की तेजी से बढ़ती कोचिंग इंडस्ट्री को कंट्रोल करने और छात्रों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार की एक उच्चस्तरीय कमेटी ने कुछ क्रांतिकारी प्रस्तावों पर मंथन शुरू कर दिया है। इन सुझावों में सबसे चौंकाने वाला प्रस्ताव यह है, कि JEE, NEET और CUET जैसी कंपटीटिव एंट्रेंस एग्जाम्स को Class XII की जगह Class XI में ही कराया जाए। यह फैसला लाखों छात्रों और उनके परिवारों की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला सकता है।

    Class XI में एंट्रेंस एग्जाम का प्रस्ताव-

    पिछले महीने 15 नवंबर को हुई मीटिंग में 11 मेंबर्स की पैनल ने उन दबावों पर चर्चा की, जो छात्रों को साल भर की इंटेंसिव कोचिंग की ओर धकेलते हैं। कमेटी के मेंबर्स ने इस बात पर विचार किया, कि क्या नैशनल लेवल की एंट्रेंस एग्जाम्स को Class XI में शिफ्ट किया जा सकता है। हालांकि, इस फैसले से पहले यह देखना जरूरी होगा, कि स्कूल बोर्ड्स का Class XI का सिलेबस कितना एलाइन है।

    कुछ कमेटी मेंबर्स का मानना है, कि एग्जाम्स को एक साल पहले करने से Class XII में बनने वाले उस भारी प्रेशर को कम किया जा सकता है जो कोचिंग सेंटर्स को अत्यधिक शक्तिशाली बना देता है। साथ ही, साल में दो बार एग्जाम्स कराने का विचार भी सामने आया है, जो अप्रैल और नवंबर में हो सकती हैं। यह NEP-2020 के ऑब्जेक्टिव्स के अनुरूप भी होगा।

    कोचिंग घंटों पर लगेगी सीमा-

    कमेटी ने एक और महत्वपूर्ण सुधार पर चर्चा की है, जो कोचिंग सेंटर्स में बिताए जाने वाले घंटों को नियंत्रित करेगा। मेंबर्स ने प्रस्ताव रखा है कि डेली कोचिंग क्लासेज को अधिकतम दो से तीन घंटे तक सीमित किया जाए। यह उन पांच से छह घंटे की क्लासेज से बिल्कुल अलग होगा, जो आजकल मेजर कोचिंग हब्स में आम हैं। इस कदम का उद्देश्य छात्रों की थकान कम करना, स्कूल और कोचिंग के बीच बैलेंस करना और क्लासरूम लर्निंग को फिर से प्राथमिकता देना है।

    हाइब्रिड इवैल्यूएशन मॉडल की संभावना-

    पैनल ने एक हाइब्रिड एडमिशन फ्रेमवर्क पर भी गंभीरता से विचार किया, जिसमें बोर्ड एग्जाम स्कोर्स और एप्टीट्यूड असेसमेंट्स दोनों को वेटेज दी जाएगी। अधिकारियों का मानना है, कि यह मॉडल स्कूल बेस्ड लर्निंग को मजबूत करेगा और प्राइवेट कोचिंग पर अत्यधिक निर्भरता को कम करेगा।

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    चर्चा में सिस्टेमिक गैप्स पर भी ध्यान दिया गया, जिसमें बोर्ड्स के बीच फ्रैगमेंटेड सिलेबस, डमी स्कूल्स का बढ़ना, असमान टीचर ट्रेनिंग, कमजोर फॉर्मेटिव असेसमेंट्स और स्ट्रक्चर्ड करियर गाइडेंस की कमी शामिल हैं। NCERT को अब CBSE और स्टेट बोर्ड्स के साथ मिलकर Class XI और XII के सिलेबस की तुलना कंपटीटिव एग्जाम रिक्वायरमेंट्स से करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि करिकुलम डिस्पैरिटीज को कम किया जा सके।

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    By sumit

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