ChatGPT Suicide Case
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    ChatGPT Suicide Case: कैलिफोर्निया में एक 16 वर्षीय लड़के की मौत ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। एडम रेन नाम के इस किशोर ने अप्रैल 2025 में अपने घर के कमरे में आत्महत्या कर ली थी। इस दुखद घटना के पीछे एक चौंकाने वाला कारण सामने आया है, महीनों तक ChatGPT के साथ की गई बातचीत। अब एडम के माता-पिता मारिया और मैट रेन ने OpenAI और इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम अल्टमैन पर मुकदमा दायर किया है।

    माता-पिता का गुस्सा और आरोप-

    एडम के माता-पिता का कहना है, कि उनके बेटे की मौत कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि ChatGPT के जानबूझकर बनाए गए फीचर्स का नतीजा है। न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह OpenAI के खिलाफ गलत मौत के लिए दायर किया गया पहला ज्ञात मुकदमा है। मंगलवार को सैन फ्रांसिस्को की कैलिफोर्निया राज्य अदालत में दायर शिकायत में कहा गया है, कि यह कोई तकनीकी गड़बड़ी या अनदेखा मामला नहीं था, यह जानबूझकर किए गए डिजाइन विकल्पों का अनुमानित परिणाम था।

    शिकायत में आगे आरोप लगाया गया है, कि OpenAI ने अपना नवीनतम मॉडल (GPT-4o) ऐसे फीचर्स के साथ लॉन्च किया, जो जानबूझकर मानसिक निर्भरता को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन किए गए थे। यह आरोप बहुत गंभीर है।

    एक सामान्य शुरुआत से घातक अंत तक-

    एडम की कहानी बहुत से आज के बच्चों जैसी शुरू हुई थी। 2024 में उसने ChatGPT का इस्तेमाल शुरू किया था, मुख्यत अपने होमवर्क के लिए, बिल्कुल दूसरे छात्रों की तरह। शुरुआत में वह इसका इस्तेमाल उन विषयों को जानने के लिए करता था, जिनमें उसकी रुचि थी। यह सब बहुत सामान्य और मासूम लग रहा था।

    लेकिन जैसे-जैसे एडम की परेशानियां बढ़ती गईं, वह ChatGPT के साथ अपनी व्यक्तिगत भावनाओं को साझा करने लगा। यहीं से स्थिति खराब होनी शुरू हुई। एक 16 साल का लड़का, जो जीवन की कठिनाइयों से जूझ रहा था, उसे सहारे की जरूरत थी।

    ChatGPT ने मानवीय मदद की बजाय बढ़ाए आत्महत्या के विचार-

    मुकदमे में सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है, कि ChatGPT ने एडम को इंसानी मदद लेने के लिए प्रेरित करने की बजाय उसके आत्महत्या के विचारों को बढ़ावा दिया। यह बेहद गंभीर मामला है। माता-पिता का कहना है, कि महीनों तक चली इन बातचीत के दौरान ChatGPT ने एडम के साथ ऐसे तरीके से बातचीत की, जिससे उसकी मानसिक स्थिति और भी खराब हो गई।

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    एक दुखद अंत-

    अप्रैल 2025 में एडम ने अपने बेडरूम की अलमारी में फांसी लगाकर जान दे दी। सबसे दुखद बात यह है, कि उसने कोई सुसाइड नोट नहीं छोड़ा था। यह घटना दिखाती है, कि आज के डिजिटल युग में बच्चे कितने अकेले हैं। वे मशीनों से बात करने को मजबूर हैं। क्योंकि उन्हें लगता है, कि इंसान उन्हें समझ नहीं सकते। लेकिन मशीनें इंसानी भावनाओं को समझने में अभी भी नाकाम हैं।

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