Stray Dog ​​Free Country
    Photo Source - Google

    Stray Dog ​​Free Country: दुनियाभर में आवारा जानवरों की समस्या एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। अधिकतर देशों की सड़कों पर भूखे-प्यासे जानवर भोजन, आश्रय और देखभाल की तलाश में भटकते रहते हैं। लेकिन नीदरलैंड्स ने इस मामले में एक अनूठी मिसाल कायम की है। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जहां सड़कों पर एक भी आवारा कुत्ता नजर नहीं आता।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि रातोंरात हासिल नहीं हुई है। नीदरलैंड्स ने 1990 से शुरू की गई, अपनी व्यवस्थित योजना के जरिए 2019 तक पूर्ण सफलता प्राप्त की। आज इस देश की साफ-सुथरी और सुरक्षित सड़कें न केवल इंसानों बल्कि जानवरों के लिए भी आदर्श वातावरण प्रदान करती हैं।

    मजबूत कानूनी ढांचे से मिली नींव-

    डेली जागरण के मुताबिक, नीदरलैंड्स की सफलता की कहानी शुरू हुई, मजबूत पशु कल्याण कानूनों से। 1990 में लागू किए गए ये नियम अत्यंत कड़े हैं और पालतू जानवरों के साथ दुर्व्यवहार या उन्हें छोड़ने के लिए भारी जुर्माना और सजा का प्रावधान है। यहां जानवरों को केवल संपत्ति नहीं, बल्कि संवेदनशील जीव माना जाता है, जिनके भी अधिकार हैं।

    निःशुल्क नसबंदी कार्यक्रमों का जादू-

    सरकारी सहायता से चलाए गए, नसबंदी कार्यक्रमों ने अतिरिक्त जनसंख्या की समस्या को जड़ से हल किया। यह दृष्टिकोण न केवल किफायती था, बल्कि दयालु भी था। नियमित नसबंदी अभियान और निःशुल्क सेवाओं ने सुनिश्चित किया, कि अनचाहा प्रजनन नियंत्रण में रहे। डच सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 1990 से 2019 के बीच लाखों पालतू जानवरों की सफल नसबंदी की गई, जिसने जनसंख्या विस्फोट को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    गोद लो, खरीदो मत-

    नीदरलैंड्स में एक शक्तिशाली सामाजिक आंदोलन चलाया गया – “खरीदने के बजाय गोद लेना”। राष्ट्रीय अभियानों के माध्यम से लोगों को शिक्षित किया गया कि पालतू जानवरों को खरीदने के बजाय आश्रयस्थलों से गोद लेना बेहतर है। स्थानीय समुदायों और आश्रयस्थलों के सहयोग से हजारों आवारा जानवरों को प्रेमपूर्ण घर मिले।

    एम्स्टर्डम की एक पशु आश्रयस्थल की प्रबंधक एना क्लाउस बताती हैं, “हमारे यहां गोद लेने के लिए प्रतीक्षा सूची है, क्योंकि लोग पहले आश्रयस्थल में देखते हैं फिर पालतू जानवर की दुकानों में जाते हैं।”

    जनजागरूकता और शिक्षा बनी गेम चेंजर-

    सबसे महत्वपूर्ण कारक था जनजागरूकता और शिक्षा। स्कूलों में बच्चों को पशु देखभाल के बारे में सिखाया गया। परिवारों को जिम्मेदार पालतू जानवर पालने के बारे में शिक्षित किया गया। इस शैक्षिक दृष्टिकोण ने एक पूर्ण सांस्कृतिक बदलाव लाया, जहां पशु कल्याण को प्राथमिकता दी जाने लगी।

    कड़े पालतू जानवर पालने के नियम-

    नीदरलैंड्स में पालतू जानवर पालना कोई आकस्मिक फैसला नहीं है। हर कुत्ते के मालिक को अपने पालतू जानवर को पंजीकृत करवाना होता है। नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और उचित देखभाल अनिवार्य है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है, कि हर पालतू जानवर को उचित देखभाल मिले और छोड़ने की संभावना न्यूनतम हो।

    अन्य देश क्यों संघर्ष कर रहे हैं-

    जबकि नीदरलैंड्स में यह अविश्वसनीय सफलता मिली है, दुनिया के बाकी देश अभी भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। इसकी मुख्य वजहें हैं, कमजोर कानून, अपर्याप्त नसबंदी कार्यक्रम, जागरूकता की कमी और सीमित सरकारी सहायता। बहुत से देशों में पालतू जानवरों को छोड़ना या उनकी उचित देखभाल न करना गंभीरता से नहीं लिया जाता।

    ये भी पढ़ें- भारत की वो सड़क, 40 साल में नहीं बना एक भी गड्ढा फिर भी दोबारा इस कंपनी को क्यों नहीं मिला टेंडर?

    अतिरिक्त जनसंख्या का चक्र तब तक चलता रहता है जब तक व्यवस्थित हस्तक्षेप नहीं किया जाता। अनेक देशों में क्रूर तरीकों जैसे मारना या जहर देना का उपयोग किया जाता है जो न केवल अमानवीय है बल्कि दीर्घकालिक समाधान भी नहीं है।

    विश्व के लिए नीदरलैंड्स मॉडल की सीख-

    नीदरलैंड्स का मॉडल सिद्ध करता है, कि आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान संभव है। मुख्य सीख हैं, शिक्षा आधार है, मानवीय तरीके सबसे अच्छा काम करते हैं, और गोद लेना खरीदने से बेहतर है एक प्रत्यक्ष समाधान है। सरकारी सहायता, सामुदायिक सहभागिता और निरंतर प्रयासों से यह बदलाव हासिल किया जा सकता है।

    ये भी पढ़ें- SBI से HDFC तक नियमो में बदलाव! जानिए सेविंग्स अकाउंट में अब कितना रखना होगा मिनिमम बैलेंस?