Pakistan Spy: नोएडा और ग्रेटर नोएडा इलाके में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) ने दो युवकों को पाकिस्तान के लिए जासूसी और बड़े हमले की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया। आरोपी ग्रेटर नोएडा के छपरौला गांव के रहने वाले हैं, जिनकी पहचान लोकेश उर्फ पपला (19) और विकास गहलावत उर्फ रौनक (27) के रूप में हुई है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, दोनों युवक पिछले कुछ महीनों से संदिग्ध गतिविधियों में शामिल थे।
लखनऊ रेलवे स्टेशन को बनाया गया था निशाना-
ATS अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपियों ने लखनऊ रेलवे स्टेशन को टारगेट करते हुए सिग्नल सिस्टम को नुकसान पहुंचाने की योजना बनाई थी। यह साजिश अगर सफल हो जाती, तो इससे बड़े स्तर पर रेल यातायात बाधित हो सकता था और यात्रियों की जान भी खतरे में पड़ सकती थी। हालांकि, समय रहते ATS ने कार्रवाई करते हुए दोनों को गिरफ्तार कर लिया और एक बड़ी घटना को टाल दिया।
सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान से जुड़ा नेटवर्क-
जांच में सामने आया है, कि दोनों युवक करीब छह महीने पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स Telegram, Signal और Instagram के जरिए पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के संपर्क में आए थे। इसके बाद उन्होंने जानबूझकर इस आतंकी नेटवर्क को जॉइन किया और उनके निर्देशों पर काम करने लगे। अधिकारियों का कहना है, कि आरोपियों को इन गतिविधियों के बदले पैसे भी दिए जाते थे।
पंजाब में भी कर चुके हैं संदिग्ध गतिविधियां-
ATS की जांच में यह भी खुलासा हुआ है, कि दोनों आरोपी पहले पंजाब में भी इसी तरह की घटनाओं में शामिल रहे हैं। किरातपुर इलाके में ट्रक में आग लगाने की घटना से भी इनका लिंक सामने आया है। इतना ही नहीं, आरोपियों ने उस घटना का वीडियो बनाकर अपने हैंडलर्स को भेजा था, जिससे यह साबित होता है, कि वे लगातार निर्देशों पर काम कर रहे थे।
एन्क्रिप्टेड ऐप्स और QR पेमेंट से छुपाया ट्रेल-
जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह रही, कि आरोपी एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे उनकी बातचीत को ट्रैक करना मुश्किल हो गया था। पेमेंट के लिए QR कोड का इस्तेमाल किया गया, जिससे फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन को पकड़ना भी आसान नहीं था। फिलहाल सात मोबाइल नंबर और तीन बैंक खातों की निगरानी की जा रही है और फॉरेंसिक टीम डिवाइस की जांच कर रही है।
लोकल इंटेलिजेंस पर उठे सवाल-
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्थानीय खुफिया तंत्र पर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोपी राम विहार कॉलोनी में रह रहे थे, जहां किरायेदारों का सत्यापन ठीक से नहीं होता। अधिकारियों का मानना है, कि ऐसी लापरवाही का फायदा पहले भी अपराधी और आतंकी उठा चुके हैं।
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सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा-
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है, कि देश विरोधी ताकतें अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं को अपने जाल में फंसा रही हैं। ऐसे में जरूरत है, ज्यादा सतर्क रहने की और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत जानकारी देने की, जिससे समय रहते किसी भी बड़ी साजिश को रोका जा सके।
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