Punjab Chitta Drug Problem: पंजाब के कपूरथला से एक ऐसी दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक बुजुर्ग मां ने नशे की लत के कारण अपने पांचों बेटों को खो दिया। ताजा मामला उनके आखिरी बेटे की मौत से जुड़ा है, जिसने इस दर्दनाक कहानी को फिर से सुर्खियों में ला दिया।
अस्पताल में टूटी आखिरी उम्मीद-
बताया जा रहा है, कि गंभीर हालत में युवक को Government Medical College, Amritsar में भर्ती कराया गया था। उसकी हालत बेहद नाजुक थी और वह कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहा था, जिनमें हेपेटाइटिस C, HIV और फेफड़ों में पानी भरना शामिल था। डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर पर रखा। मंगलवार सुबह कुछ सुधार के संकेत जरूर मिले, लेकिन दोपहर तक उसकी हालत अचानक बिगड़ गई और करीब 3 बजे उसने दम तोड़ दिया।
बेटे की मौत की खबर सुनते ही मां बेसुध-
शाम को जब मां को बेटे की मौत की खबर दी गई, तो वह खुद को संभाल नहीं पाईं और वहीं बेहोश होकर गिर पड़ीं। होश में आने के बाद वह बार-बार यही कहती रहीं कि अब उनके सभी पांचों बेटे उनसे छिन गए हैं। उनकी चीख-पुकार ने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया।
मेरे सारे बेटे चिट्टे के शिकार थे-
टूटी आवाज में मां ने कहा, कि उनके सभी बेटे चिट्टा जैसे खतरनाक नशे के आदी हो चुके थे। हालांकि पुलिस और कुछ अधिकारियों ने उनके इस दावे से इनकार किया और कहा, कि अलग-अलग कारणों से बेटों की मौत हुई है। लेकिन मां का दर्द इन दलीलों से कहीं बड़ा था। वह साफ कहती रहीं, कि एक मां अपने बच्चों के बारे में झूठ क्यों बोलेगी।
इलाज की कोशिशें भी नाकाम-
मां ने बताया, कि उन्हें अपने छोटे बेटे की नशे की लत के बारे में पहले से पता था। उन्होंने उसका इलाज भी करवाया और कुछ समय के लिए वह ठीक भी हो गया था। परिवार ने उसकी शादी भी कराई, ताकि वह सामान्य जीवन जी सके। लेकिन नशे की गिरफ्त इतनी गहरी थी, कि आखिरकार उसने उसकी जान ले ली।
इलाके में गुस्सा, महिलाओं का फूटा आक्रोश-
इस घटना के बाद इलाके में जबरदस्त गुस्सा देखने को मिला। स्थानीय महिलाओं ने आरोप लगाया, कि इलाके में खुलेआम चिट्टा बेचा जा रहा है, यहां तक कि पुलिस स्टेशन के आसपास भी ड्रग्स की सप्लाई हो रही है। लोगों का कहना है, कि नशा बेचने वाले बेखौफ होकर आते हैं और कुछ ही मिनटों में सामान देकर निकल जाते हैं।
कई घरों में बर्बादी की एक जैसी कहानी-
इस एक परिवार की कहानी अकेली नहीं है। इलाके की कई महिलाओं ने बताया, कि उन्होंने भी अपने दो या तीन बेटों को नशे की वजह से खो दिया है। किसी का कमाने वाला बेटा चला गया, तो किसी के घर के सभी सहारे खत्म हो गए। एक बुजुर्ग दादी ने अपने छोटे-छोटे पोते-पोतियों की ओर इशारा करते हुए कहा, “हमारे बेटे तो चले गए, कम से कम इन बच्चों को बचा लो।”
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नशे के खिलाफ बड़ी चुनौती-
यह घटना सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत है। पंजाब में नशे की समस्या कितनी गहरी हो चुकी है, यह इस कहानी से साफ झलकता है। अब सवाल यह है, कि आखिर कब तक ऐसे परिवार उजड़ते रहेंगे और कब इस समस्या पर सख्त कार्रवाई होगी।
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