LPG Priority Allocation India
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    LPG Priority Allocation India: जब दुनिया के किसी कोने में आग लगती है, तो उसकी लपटें कहीं न कहीं आम इंसान की रसोई तक पहुंच ही जाती हैं। इस बार वो आग पश्चिम एशिया में लगी है और उसकी तपिश भारत के घरों में जलने वाले LPG सिलेंडर तक महसूस होने लगी है। अमेरिका और इज़राइल के ईरान पर हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले जहाज़ों की रफ़्तार थाम दी है।

    दुनिया के समुद्री तेल का लगभग पांचवां हिस्सा और वैश्विक LNG का करीब एक तिहाई इसी संकरी जलसंधि से होकर गुज़रता है और यही भारत की ऊर्जा ज़रूरतों की मुख्य नस भी है।

    सरकार ने सोमवार रात जारी की अहम जानकारी-

    हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने सोमवार देर रात एक राजपत्र अधिसूचना जारी करके साफ कर दिया, कि अब घरेलू स्तर पर निकाली जाने वाली प्राकृतिक गैस सबसे पहले उन इकाइयों को दी जाएगी, जो LPG, CNG और घरों तक पहुंचने वाली पाइप्ड गैस बनाती हैं।

    इन तीनों क्षेत्रों को पिछले छह महीनों की औसत खपत का पूरा 100 प्रतिशत गैस मिलेगा। यानी आपकी रसोई और आपकी गाड़ी दोनों को ईंधन देना सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है। इस फैसले को लागू करने की ज़िम्मेदारी सरकारी गैस कंपनी GAIL को सौंपी गई है।

    किसे कितनी गैस, किस नंबर पर?

    प्राथमिकता सूची में दूसरे नंबर पर खाद यानी उर्वरक उद्योग है, जिसे पिछले छह महीनों की खपत का कम से कम 70 प्रतिशत गैस मिलेगा, ताकि किसानों की खेती प्रभावित न हो। तीसरे नंबर पर चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक उपभोक्ता हैं, जिन्हें 80 प्रतिशत तक आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश की जाएगी। चौथे नंबर पर वो शहरी गैस वितरण कंपनियां हैं, जो इंडस्ट्रियल और कमर्शियल ग्राहकों को गैस देती हैं।

    उन्हें भी 80 प्रतिशत तक सप्लाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। तेल शोधन कंपनियों यानी रिफाईनरीज़ को अपनी खपत में खुद कटौती करनी होगी और उन्हें पिछले छह महीनों की खपत का करीब 65 प्रतिशत ही मिलेगा। पैट्रोकैमिकल प्लांट्स और बिजली उत्पादन इकाइयों की गैस में सबसे ज़्यादा कटौती होगी, जिससे प्राथमिक क्षेत्रों को पर्याप्त गैस मिल सके।

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    होर्मुज़ बंद तो भारत की सांसें अटकीं-

    भारत अपनी कुल 191 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन की गैस ज़रूरत का करीब आधा ही घरेलू स्तर पर पैदा कर पाता है। बाकी आधा आयात करना पड़ता है और वो ज़्यादातर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर आता है। अब जब वहां जहाज़ों की आवाजाही ठप हो गई है, बीमा प्रीमियम आसमान छू रहे हैं और एनर्जी मार्केट में हलचल मच गई है, तो भारत के पास यही विकल्प बचा, कि जो गैस देश में मिलती है, उसे समझदारी से बांटा जाए। अधिसूचना में साफ लिखा है, कि LNG आपूर्तिकर्ताओं ने अप्रत्याशित परिस्थितियों का हवाला देकर अपनी ज़िम्मेदारी से हाथ खींच लिया है।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।