America-Iran War 2026: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग थमने का नाम नहीं ले रही। मध्य-पूर्व का आसमान मिसाइलों से भरा हुआ है और दुनिया भर के लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, कि यह खूनी संघर्ष आखिर कब खत्म होगा। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध की समयसीमा को लेकर बड़ा बयान दिया है।
ट्रंप बोले ‘नेतन्याहू के साथ मिलकर लेंगे फैसला’-
रविवार को द टाइम्स ऑफ इजराइल से बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने का फैसला ‘साझा’ होगा और वो यह निर्णय इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मिलकर लेंगे। जब उनसे पूछा गया, कि युद्ध कब समाप्त होगा, तो उन्होंने कहा, कि वो सही वक्त पर फैसला करेंगे और हर पहलू को ध्यान में रखा जाएगा। ट्रंप ने यह भी जोड़ा, कि दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत चल रही है।
ईरान की ताकत और इरादों पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा, कि तेहरान इजराइल और उसके आसपास के सभी देशों को तबाह करने की फिराक में था। उन्होंने दावा किया, कि अमेरिका और इजराइल ने मिलकर उस देश को नष्ट कर दिया, जो इजराइल को मिटाना चाहता था। जब पूछा गया, कि अगर अमेरिका युद्ध से पीछे हट जाए, तो क्या इजराइल अकेले लड़ सकता है, तो ट्रंप ने कहा, कि उन्हें नहीं लगता ऐसी नौबत आएगी।
खामेनेई की मौत और ईरान की बदले की आग-
इधर ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी ने शनिवार को ईरानी राजकीय टेलीविजन पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, कि तेहरान अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला जरूर लेगा। गौरतलब है, कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमलों में खामेनेई मारे गए थे। लारिजानी ने ट्रंप पर ईरान को कमजोर आंकने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी, कि यह संघर्ष जल्दी खत्म नहीं होने वाला।
लारिजानी ने कहा, कि ट्रंप ने वेनेजुएला में जो किया उसका स्वाद चखा और सोचा कि ईरान में भी वैसा ही होगा, लेकिन अब वो फँस चुके हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, कि ईरान अपने नेता की शहादत और एक हजार से ज्यादा अपने लोगों की जान का हिसाब लेकर रहेगा। यह कोई छोटी बात नहीं है। लारिजानी ने सोशल मीडिया मंच X पर भी यही दोहराया और लिखा, कि जब तक बदला नहीं लिया जाएगा, तब तक ट्रंप को चैन से नहीं बैठने देंगे।
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दुनिया की नजरें मध्य-पूर्व पर टिकी हैं-
यह वो जंग है, जिसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। एक तरफ अमेरिका और इजराइल का गठजोड़ है, दूसरी तरफ ईरान का टूटा हुआ लेकिन गुस्से से भरा हुआ नेतृत्व। खाड़ी देशों पर हमले, तेल आपूर्ति में रुकावट और मिसाइलों की बारिश यह सब मिलकर एक ऐसा संकट बन गया है, जिसका असर सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ रहा है। फिलहाल शांति की कोई किरण नजर नहीं आती और दोनों पक्ष अपनी-अपनी जिद पर अड़े हुए हैं।
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