Meerut News
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    Meerut News: मेरठ से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पूरे शहर में हंगामा मचा दिया है। एक महिला ने नाली साफ कराने के लिए ऐसा जुगाड़ लगाया, कि पुलिस भी हैरान रह गई। टीपी नगर एरिया की इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है, कि क्या आम नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए ऐसे रास्ते अपनाने पड़ेंगे? आइए जानते हैं पूरा मामला।

    हजारों शिकायतों के बावजूद नहीं हुई सुनवाई-

    मेरठ के टीपी नगर इलाके में रहने वाली एक महिला और उसके आसपास के लोग कई महीनों से एक बंद नाली से परेशान थे। नाली में इतना कचरा जम गया था, कि पानी की निकासी बिल्कुल बंद हो चुकी थी। बारिश के मौसम में तो हालात और भी बदतर हो जाते थे। इलाके के लोगों ने हजारों शिकायती पत्र लिखे, सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की।

    सरकारी बाबुओं की लापरवाही से तंग आकर इस महिला ने एक अनोखा तरीका अपनाया। जब सीधी उंगली से घी नहीं निकला तो उसने टेढ़ी उंगली का सहारा लिया। उसने पुलिस को फोन किया और चीखते हुए कहा, कि उसका बच्चा नाली में गिर गया है। पुलिस तुरंत एक्शन में आ गई और मौके पर पहुंच गई।

    3 घंटे खोजा गायब बच्चे को, निकला सालों का कचरा-

    महिला की फोन कॉल के बाद पुलिस की टीम फौरन मौके पर पहुंच गई। उन्होंने पूरे 3 घंटे तक बच्चे को खोजने के लिए नाली की सफाई शुरू कर दी। एक-एक करके पूरे कचरे को बाहर निकाला गया। जो काम सरकारी विभाग सालों से नहीं कर रहा था, वो पुलिस ने कुछ ही घंटों में कर दिया। लेकिन कितनी भी कोशिश के बाद बच्चा नहीं मिला, क्योंकि दरअसल, कोई बच्चा था ही नहीं।

    जब पुलिस ने महिला से सवाल किया, तो उसने पूछा, “कैसा लगा हमारा मजाक?” पुलिस वाले सन्न रह गए। महिला ने समझाया, कि वो और इलाके के बाकी लोग इस बंद नाली से महीनों से परेशान थे। हजारों शिकायतें करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई, इसलिए उसे यह कदम उठाना पड़ा। उसके इस एक फोन कॉल से जो काम हजारों पत्रों से नहीं हुआ, वो हो गया।

    लोगों में बंटी राय, क्या सही क्या गलत?

    इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग महिला के इस कदम को सराह रहे हैं। उनका कहना है, कि जब सिस्टम काम नहीं करता, तो आम आदमी को ऐसे ही जुगाड़ लगाने पड़ते हैं। इस बहाने सही में नाली साफ हो गई और सालों का जमा कचरा एक साथ निकल गया। लेकिन दूसरी ओर कुछ लोग इसे गलत बता रहे हैं। उनका मानना है, कि इमरजेंसी सर्विसेज का दुरुपयोग करना सही नहीं है और यह एक खतरनाक मिसाल है।

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    यह घटना सरकारी विभागों की लापरवाही और जनता की मजबूरी का एक जीता-जागता उदाहरण है। जब तक सिस्टम में सुधार नहीं होगा, ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। हालांकि, किसी को भी इस तरह का मजाक करने की सलाह नहीं दी जाती, क्योंकि इससे गंभीर कानूनी परेशानियां हो सकती हैं।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।