Dr. Ankur Bajaj: लखनऊ में एक ऐसी घटना हुई, जिसने पूरे शहर को हिला दिया। तीन साल के मासूम कार्तिक के साथ हुआ हादसा किसी भी माता-पिता के लिए सबसे बुरे सपने जैसा था। छत से गिरने के दौरान एक रॉड उसके सीने में घुस गई, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई। लेकिन जो बात इस कहानी को खास बनाती है, वह है King George Medical College के एक डॉक्टर की इंसानियत और समर्पण।
परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी और प्राइवेट अस्पताल में 15 लाख रुपए की मांग देखकर उनके होश उड़ गए। यहीं पर डॉक्टर अंकुर बजाज का किरदार सामने आया, जिन्होंने इस बच्चे की जान बचाने के लिए अपनी व्यक्तिगत समस्याओं को साइड में रखकर एक चमत्कार कर दिखाया।
व्यक्तिगत त्रासदी के बावजूद बने हीरो-
सबसे चौंकाने वाली बात यह है, कि सर्जरी से कुछ घंटे पहले ही डॉक्टर बजाज की अपनी मां को दिल का दौरा पड़ा था। कोई भी इंसान होता, तो शायद अपनी पारिवारिक इमरजेंसी के कारण ऑपरेशन को टाल देता। लेकिन डॉ. बजाज ने अपनी प्रोफेशनल जिम्मेदारी को सबसे ऊपर रखा और छह घंटे तक लगातार ऑपरेट करके कार्तिक की जान बचाई।
सरकारी अस्पताल में यह पूरा इलाज सिर्फ 25,000 रुपए में हुआ, जो प्राइवेट सेक्टर के मुकाबले बहुत ही वाजिब था। यह घटना एक बार फिर से साबित करती है, कि अगर नेक इरादे हों तो हेल्थकेयर किफायती भी हो सकती है।
कौन हैं डॉक्टर अंकुर बजाज?
King George Medical University में न्यूरोसर्जरी के प्रोफेसर के रूप में काम करने वाले डॉक्टर अंकुर बजाज चार साल से अधिक के अनुभव के साथ एक दिग्गज सर्जन हैं। ट्रामा, स्कल बेस सर्जरी और पीडियाट्रिक न्यूरोसर्जरी में उनकी विशेषज्ञता है। उन्हें 2018 में एक फ्लाइट में यात्री की जान बचाने के लिए All Nippon Airways द्वारा सम्मानित भी किया गया था।
डॉक्टर बजाज ने PGIMER चंडीगढ़ से न्यूरोसर्जरी की डिग्री हासिल की है और बच्चों के न्यूरोट्रामा पर रिसर्च में भी सक्रिय रूप से शामिल हैं। उनका यह केस एक बार फिर दिखाता है, कि मेडिकल प्रोफेशन सिर्फ एक जॉब नहीं बल्कि सेवा का माध्यम है।
सच्चे हीरो केप नहीं, सफेद कोट पहनते हैं-
इस केस के बाद सोशल मीडिया पर डॉक्टर बजाज की जमकर तारीफ हुई है। LinkedIn पर यूजर्स ने उनकी dedication की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। एक कमेंट में लिखा गया, “सच्चे हीरो हमेशा यूनिफॉर्म नहीं पहनते कुछ सफेद कोट पहनते हैं।”
वहीं दूसरी तरफ, लोगों ने भारत की हेल्थकेयर सिस्टम की समस्याओं को भी उजागर किया। एक उपयोगकर्ता ने लिखा, कि डॉक्टर की दयालुता तो तारीफ के काबिल है, लेकिन यह हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था की दुखदायी सच्चाई भी है। “परिवारों को जिंदगी और आर्थिक बर्बादी के बीच चुनाव नहीं करना चाहिए। उन डॉक्टरों का सम्मान जो इंसानियत को पहले रखते हैं।”
इंटरनेट पर छाई डॉक्टर की तारीफ-
प्रफुल्ल बिल्लोरे के सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जब यह घटना सामने आई, तो इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने डॉक्टर बजाज को उम्मीद की किरण बताया। मनोज उप्रेती नाम के एक व्यक्ति ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया, कि एक ठेकेदार कर्मचारी की आंत फट जाने पर नर्सिंग होम में सिर्फ 25,000 रुपए में एक्स-रे, ऑपरेशन, दवाई और 6 दिन के रुकने का पूरा इलाज हुआ। उन्होंने अपने कमेंट में लिखा, “अभी गाँव और कस्बों में मानवता जिंदा है। सभी मशीन नहीं हुए हैं।” यह बात इस पूरे मामले की सच्चाई को बयान करती है।
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स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल-
इस घटना ने एक बार फिर भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था की विसंगतियों को उजागर किया है। एक तरफ जहां निजी अस्पताल लाखों रुपए की मांग कर रहे थे, वहीं सरकारी अस्पताल में बेहतरीन इलाज हजारों में मिला। यह मामला सभी के लिए एक सबक है, कि अच्छे इलाज के लिए हमेशा महंगे निजी अस्पतालों की जरूरत नहीं होती।
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