Himachal Flood
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    Himachal Flood: पर्यावरण कार्यकर्ता डॉ मनु सिंह ने चेतावनी दी है, कि हिमाचल प्रदेश में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के पीछे कैंसरस टूरिज्म यानी अनियंत्रित पर्यटन की भूमिका है। डॉ सिंह ने बताया, कि इस आपदा का 80 प्रतिशत कारण जलवायु परिवर्तन है, जबकि केवल 20 प्रतिशत प्राकृतिक हिमालयी बदलाव का परिणाम है।

    पिछले कुछ हफ्तों में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे हिमालयी राज्यों में भीषण बाढ़, भूस्खलन और विनाशकारी बारिश देखी गई है। सड़कें बह गईं, कई गांव कट गए और हजारों लोग बेघर हो गए। यह स्थिति सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि मानवीय गलतियों का परिणाम है।

    वैश्विक तापमान वृद्धि का प्रभाव-

    टाइम्स नाउ के मुताबिक, डॉ सिंह ने समझाया, कि वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण हवा पहले से कहीं ज्यादा गर्म हो गई है। गर्म हवा में अधिक नमी होती है, जिससे घने बादल बनते हैं। जलवायु अब अनियमित हो गई है और कम्यूलोनिम्बस बादलों के निर्माण में 700 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी गई है।

    ये घने बादल जब हिमालयी क्षेत्र तक पहुंचते हैं, तो ऑरोग्राफिक इफेक्ट के कारण अचानक भारी वर्षा शुरू हो जाती है। इससे क्लाउडबर्स्ट होता है, जिसमें एक घंटे से कम समय में 20-30 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में 100 मिमी या उससे अधिक बारिश हो जाती है।

    अनियोजित निर्माण की समस्या-

    हिमाचल प्रदेश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने बाढ़ की समस्या को और बढ़ा दिया है। डॉ सिंह ने बताया, कि अवैध और अनियंत्रित निर्माण उद्योग, जिसमें वैज्ञानिक तरीके से न बनाई गई सड़कें और इको-टूरिज्म की जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाए गए होटल और रिसॉर्ट शामिल हैं, युवा पर्वतीय सतह को नष्ट कर रहे हैं। धराली की दुखदायी तस्वीरों को देखें, तो पता चलता है, कि निर्माण नदियों के बिल्कुल बीच में किया गया था। जब बाढ़ आई, तो हमने इसे त्रासदी कहा। लेकिन डॉ सिंह इसे मानवीय मूर्खता बताते हैं, क्योंकि रिसॉर्ट और होटल नदी के किनारे बनाए गए थे।

    सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी-

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, कि अगर यही हालात रहे तो हिमाचल प्रदेश एक या दो दशक में नक्शे से मिट जाएगा। न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और आर महादेवन की पीठ ने कहा, कि सब कुछ राजस्व कमाना ही नहीं है। राजस्व पर्यावरण और पारिस्थितिकी की कीमत पर नहीं कमाया जा सकता।

    अदालत ने यह भी कहा, कि जलवायु परिवर्तन का राज्य पर दिखाई देने वाला और चिंताजनक प्रभाव है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार को पर्यावरण की सुरक्षा के लिए आने वाले पर्यटकों पर नियंत्रण रखना होगा। डॉ सिंह का कहना है, कि नदी प्रणालियों को पूरी तरह नष्ट किया जा रहा है। ढलान अस्थिर हो जाने से न केवल पानी बल्कि भूस्खलन के दौरान कंक्रीट और मलबा भी तेजी से बहता है। यह अनियोजित निर्माण नुकसान को बढ़ाता रहेगा।

    हिमाचल में भीषण तबाही-

    राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के अनुसार, राज्य के 12 में से 11 जिलों में कुल 536 सड़कें बंद हो गई हैं। इनमें से 217 सड़कें मंडी जिले में और 167 कुल्लू में बंद हैं। लगभग 1,184 विद्युत आपूर्ति ट्रांसफार्मर और 503 जल आपूर्ति योजनाएं भी बाधित हो गई हैं।

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    20 जून से 26 अगस्त के बीच हिमाचल प्रदेश में बारिश से संबंधित घटनाओं में कम से कम 158 लोगों की मौत हुई है, जबकि 38 लापता हैं। राज्य में अब तक 90 अचानक आई बाढ़, 42 क्लाउडबर्स्ट और 85 बड़े भूस्खलन देखे गए हैं। बारिश संबंधी घटनाओं में 2,623 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

    कांगड़ा में बड़ा बंगाल गांव कटा-

    कांगड़ा जिले के दूरदराज के बड़ा बंगाल गांव में रावी नदी में आई अचानक बाढ़ ने कई सरकारी इमारतों को बहा दिया है। हालांकि जान की कोई हानि नहीं हुई है। 7,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह गांव केवल पैदल ही पहुंचा जा सकता है।

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