Hanuman Mantra: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सभी कभी न कभी थक जाते हैं। हर किसी का जन्मदिन याद रखना, दफ्तर के ईमेल का जवाब देना, बिल को समय पर भरना और फिर भी सबके सामने यह दिखानास कि सब कुछ ठीक है। यह सब करना कितना थकाने वाला है, इसके बारे में हम पर्याप्त बात नहीं करते। हम समाधान ढूंढते हैं, इलाज, पॉडकास्ट, सेल्फ इंप्रूवमेंट की किताबें पढ़ते हैं। लेकिन क्या हो, अगर उत्तर हमेशा से कहीं और था? कहीं शांत जगह, पुराने समय में, पवित्र स्थान पर।
यहां आते हैं हनुमान जी। वह सिर्फ बानर देवता नहीं हैं, सिर्फ पुराण कथा नहीं हैं। हनुमान जी उस शक्ति को दर्शाते हैं, जो ध्यान नहीं मांगती। उस भक्ति को जो प्रमाणीकरण की नहीं मांगती और उस साहस की, जो शोर नहीं मचाता। जब दुनिया बहुत तेज़ लगती है और जीवन बहुत भारी लगता है, तो हनुमान जी का स्मरण करना चमत्कार मांगना नहीं है, बल्कि यह याद रखना है, कि हम पहले से ही दिव्य सहनशीलता अपने अंदर धारण करते हैं।
हनुमान चालीसा जब मन बेचैन हो-
“श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।” यह कोई सरल पठन हनुमान चालीसा का नहीं है, यह प्राचीन ज्ञान के 40 छंद हैं, रूपकों से भरपूर। लेकिन यह आपसे हर पंक्ति समझने की मांग नहीं करती। यह सिर्फ इतना कहती है, कि उपस्थित रहें. अपनी बेचैनी के साथ बैठें और फिर भी जाप करें।
यहां मतलब यह है, कि आपको हमेशा उत्तर की जरूरत नहीं है। कभी-कभी आपको सिर्फ लय और पुनरावृत्ति की जरूरत होती है, ताकि आप फिर से वास्तविक महसूस कर सकें।
ॐ हं हनुमते नम, जब भावनाएं तेज़ हों-
यह मंत्र छोटा है, तीक्ष्ण है, और आध्यात्मिक प्रभाव से भरा है। जब मन थका हो और भावनाएं तर्क से ज्यादा ऊंची हों, तो इसे जीवनरेखा की तरह जाप करें। इसे धीरे-धीरे कहें जब तक आप याद न कर लें, आप अव्यवस्थ नहीं हैं। इसका मतलब है, कि शक्ति हमेशा गर्जना नहीं करती। कभी-कभी यह एक स्थिर अक्षर की तरह ध्वनि करती है, जो आपको सांस लेने की याद दिलाती है।
हनुमान गायत्री मंत्र: स्पष्टता के लिए-
ॐ अञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमान् प्रचोदयात्। यह मंत्र स्पष्टता के लिए है। धरती से जुड़ाव के लिए है। उन क्षणों के लिए जब आप याद नहीं कर सकते, कि कमरे में क्यों आए थे या पहली बार खुद पर संदेह क्यों करने लगे। इसका मतलब है, कि आप खोए नहीं हैं। आप सिर्फ इतने विचलित हैं कि यह नोटिस नहीं कर पा रहे कि आप अभी भी सही राह पर हैं।
बजरंग बाण जब तूफान आए-
“निशिचर बंधु महाबली, सुरभूपति सुरभार। बजरंग बलि की भक्ति से, भागें संकट हजार।” बजरंग बाण फुसफुसाता नहीं, यह आदेश देता है। आप इसका जाप तब करते हैं, जब जीवन आपको संकेत नहीं, बल्कि पूरी तरह से तूफान दे रहा हो। यह आपकी घोषणा है, कि आप अपनी प्रार्थनाओं के साथ विनम्र होने से थक गए हैं। यहां मतलब है, कि आपका एक ऐसा रूप है, जो आपके दर्द से नहीं डरता। उस रूप को भी आवाज़ देने का हक़ है।
महाबलाय स्वाहा मंत्र, गरिमा के साथ चलने के लिए-
“ॐ नमो भगवते अञ्जनेयाय महाबलाय स्वाहा।” यह मंत्र शोर-शराबे की जीत या नाटकीय सफलता के बारे में नहीं है। यह इस बारे में है, कि सिर ऊंचा करके दुनिया में कैसे चलना है, भले ही लगता हो, कि सब कुछ बिखर रहा है। इसका मतलब है, कि हर चीज़ को जीतने की जरूरत नहीं। कुछ चीज़ों को सिर्फ गरिमा के साथ उठाने की जरूरत है।
ॐ श्री हनुमते नम सुरक्षा के लिए-
आप यह तब कहते हैं, जब आप किसी अनजान चीज़ में कदम रख रहे हों। जब आप सुरक्षित रहना चाहते हैं, जीवन से नहीं, बल्कि उसमें खुद को खो देने से। इसका मतलब है, कि सुरक्षा खतरे की अनुपस्थिति नहीं है। यह उसके बीच में आंतरिक शांति की उपस्थिति है।
हनुमान अष्टक भावनात्मक गहराई के लिए-
“बाल समय रवि भक्षी लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारो। ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो।” हनुमान अष्टक तीव्र है। भावनात्मक है। यदि आप दुनिया का बोझ दूसरों से थोड़ा ज्यादा महसूस करते हैं, तो यह आपसे वहीं मिलेगा। यह आपकी गहराई को नकारता नहीं, यह इसे सम्मान देता है। इसका मतलब है, कि आपकी संवेदनशीलता कोई दोष नहीं है। यह आपकी शक्ति का द्वार है।
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घर वापसी की यात्रा-
ये मंत्र कोई जादुई गोली नहीं हैं। ये आपकी समय सीमा खत्म नहीं करते, बुरे लोगों को हटाते नहीं, या 30 सेकंड में आपकी भावनात्मक ऊर्जा भरते नहीं। लेकिन ये कुछ करते हैं और शायद ये आपकी आत्मा के लिए सांस लेने की जगह बनाते हैं।
हनुमान जी अपनी मौनता में आपको सिखाते हैं, कि सच्ची शक्ति कैसी दिखती है। कच्चा बल नहीं। शोर नहीं। बल्कि वफादारी। ध्यान। स्थिर भक्ति और शायद यही वह है, जिसकी हमें अभी सबसे ज्यादा जरूरत है। कोई और पलायन नहीं, कोई और विकर्षण नहीं, बल्कि वापसी। उस स्व की वापसी जिसे हम भूलते रहते हैं, कि हम हैं। वह स्व जो झुकता है, लेकिन टूटता नहीं।
इसलिए मंत्रों को कहें। इसलिए नहीं, कि ये सब कुछ ठीक कर देंगे, बल्कि इसलिए, कि ये आपको याद दिलाएंगें, आप कभी शक्तिहीन नहीं थे। सिर्फ थके हुए थे और अब, आखिरकार, आप अपनी ही शक्ति के घर वापस आ रहे हैं।
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