Latest News: छत्तीसगढ़ में एक बड़ा सामाजिक फैसला सामने आया है। राज्य के सेन समाज ने अपनी जिला स्तरीय बैठक में कई नए और सख्त नियम बनाए हैं, जिनमें सबसे चर्चित है। सगाई के बाद मंगेतरों के अकेले में फोन पर बात करने पर पाबंदी। सेन समाज, जो राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC में आता है, की आबादी लगभग सवा दो लाख है और इसमें करीब 70 फीसदी लोग सैलून का काम करते हैं। यह फैसला मंगलवार को हुई बैठक में लिया गया।
माँ-बाप के सामने ही होगी बात-
जानकारी के मुताबिक, जब समाज ने टूटते रिश्तों की जड़ तलाशी, तो पता चला, कि सगाई के बाद लड़का-लड़की के बीच होने वाली प्राइवेट फोन कॉल कई बार गलतफहमी और विवाद की वजह बन जाती हैं। इसी को देखते हुए यह नियम बनाया गया. कि अब सगाई के बाद और शादी से पहले मंगेतर एक-दूसरे से अकेले में बात नहीं कर सकेंगे।
अगर बात करनी भी हो, तो माता-पिता की मौजूदगी में ही होगी। समाज का मानना है, कि इससे रिश्तों में पारदर्शिता आएगी और घर-परिवार का भरोसा भी बना रहेगा।
जूता छिपाई पर भी लगी रोक-
शादियों में साली द्वारा दूल्हे का जूता छिपाना एक मज़ेदार और पुरानी परंपरा रही है, लेकिन सेन समाज ने इस पर भी रोक लगा दी है। समाज का तर्क है, कि इस रस्म के दौरान कई बार दोनों पक्षों में विवाद और तकरार हो जाती है, जो शादी के माहौल को खराब कर देती है।
इसके अलावा बैठक में यह भी तय किया गया, कि सगाई में सिर्फ 15 से 20 लोग ही जाएंगे, शादी में मुहूर्त का ध्यान रखा जाएगा और खाना पत्तल में परोसा जाएगा। समाज से बाहर धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति से रोटी-बेटी का संबंध तोड़ने का भी फैसला किया गया है।
नई पीढ़ी में बंटी राय-
सेन समाज के इन नए नियमों पर युवाओं की राय एकमत नहीं है। एक युवक ने इसका विरोध करते हुए कहा, कि जिस इंसान के साथ पूरी जिंदगी बितानी हो, उसे पहले समझना जरूरी है और यह समझ तभी आएगी जब मंगेतर आपस में खुलकर बात कर पाएंगे।
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वहीं, कुछ लोग समाज के इस फैसले को सही मानते हैं और कहते हैं, कि बड़ों की देखरेख में रिश्ते ज्यादा मजबूत बनते हैं। कुल मिलाकर यह मामला परंपरा और आधुनिक सोच के बीच की उस बहस को एक बार फिर सामने ले आया है, जो हर बदलते दौर में नया रूप लेती रहती है।
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