Dwarka Expressway Tunnel
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    Dwarka Expressway Tunnel: दिल्ली में ट्रैफिक की समस्या से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए एक बड़ा प्रोजेक्ट आकार ले रहा है। नेल्सन मंडेला मार्ग से शिव मूर्ति के बीच, Dwarka Expressway के पास, एक 5 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब टनल बनाने की योजना है। यह टनल साउथ दिल्ली और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बीच एक वैकल्पिक रास्ता देगी, जिससे रोज़ाना लाखों लोगों का सफर आसान होगा। लेकिन इस सुविधा की कीमत चुकानी पड़ सकती है करीब 1,500 पेड़ों को, जो पहले के अनुमान से तीन गुना ज़्यादा है।

    NHAI ने रखी तीन बड़ी मांगें-

    राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI ने पिछले महीने दिल्ली सरकार के अधिकारियों के साथ एक बैठक की जिसमें NH-148AE प्रोजेक्ट से जुड़ी तीन अहम समस्याओं को सुलझाने में मदद मांगी गई। पहली मांग थी, करीब 1,500 पेड़ काटने की अनुमति, जबकि पहले 417 पेड़ काटे जाने का अनुमान था।

    दूसरी मांग थी, कि टनल की दिशा में बदलाव की वजह से दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी DDA से 2.6 हेक्टेयर ज़मीन ट्रांसफर की जाए, जिसे जल्द निपटाने का अनुरोध भी किया गया है।

    तीसरी मांग थी, साउथ दिल्ली में भूमिगत पानी और सीवर लाइनें हटाने के लिए 8.27 करोड़ रुपये के अनुमान को मंजूरी दिलाना। इसके अलावा नेल्सन मंडेला मार्ग पर बिजली लाइनें हटाने के लिए 8.85 करोड़ और दिल्ली ट्रांसको के ज़रिए हाई टेंशन लाइनें हटाने के लिए 6.06 करोड़ रुपये और खर्च होंगे।

    अभी DPR के दौर में है धौला कुआं-एयरपोर्ट टनल-

    धौला कुआं से IGI एयरपोर्ट और गुरुग्राम तक प्रस्तावित भूमिगत टनल अभी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR के चरण में है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने दिसंबर में संसद को बताया, कि इस प्रोजेक्ट में निवेश और क्रियान्वयन का फैसला DPR के नतीजों, ट्रैफिक घनत्व और PM गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के साथ तालमेल के आधार पर लिया जाएगा। यह प्रोजेक्ट 2021 में NHAI के NH-148AE प्रोजेक्ट के हिस्से के रूप में घोषित किया गया था।

    पेड़ और जंगल साउथ दिल्ली के लोगों की चिंता-

    सितंबर 2024 में साउथ दिल्ली के निवासियों ने इस टनल से जंगल और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई थी। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति यानी DPCC ने इन चिंताओं को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के साथ साझा किया। DPCC के मुताबिक, यह टनल महिपालपुर और आसपास के इलाकों का ट्रैफिक जाम ज़रूर कम करेगी।

    लेकिन यह दिल्ली के चार प्रमुख रिज क्षेत्रों में सबसे बड़े दक्षिणी रिज के 5.825 हेक्टेयर और एक अन्य 1.68 हेक्टेयर वन क्षेत्र से होकर गुज़रेगी। यह इलाका दिल्ली के फेफड़े की तरह है और इसे नुकसान पहुंचाना शहर के पर्यावरण के लिए बड़ा झटका होगा।

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    सुविधा और पर्यावरण के बीच संतुलन ज़रूरी-

    यह प्रोजेक्ट दिल्ली की उस पुरानी मुश्किल की याद दिलाता है, जहां विकास और प्रकृति आमने-सामने खड़े हो जाते हैं। एक तरफ लोगों को ट्रैफिक से राहत मिलेगी, दूसरी तरफ 1,500 पेड़ों की कटाई और संरक्षित वन क्षेत्र पर असर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह है, कि DPR में क्या निकलता है और सरकार विकास और पर्यावरण के बीच किस तरह संतुलन बनाती है।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।