Faridabad: 23 अप्रैल की सुबह फरीदाबाद के पल्ला इलाके में दो स्कूली बच्चे क्लास की तरफ जा रहे थे। रास्ते में उन्हें नाले में एक शिशु का शव दिखा। उन्होंने आवाज़ लगाई, लोग इकट्ठा हुए और पुलिस बुलाई गई। शव एक 9 महीने की बच्ची का था। पोस्टमॉर्टम के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच ने जांच अपने हाथ में ली।
CCTV ने पकड़ा सच-
जांच टीम ने इलाके के CCTV फुटेज खंगाले। एक क्लिप में एक महिला बच्चे को लेकर नाले की तरफ जाती दिखी और कुछ देर बाद अकेली वापस आई। यह एक क्षण पूरी जांच की दिशा बदल गया। पुलिस ने उस महिला को पास की झुग्गी बस्ती से ढूंढकर पूछताछ के लिए बुलाया।
मां का कबूलनामा-
पूछताछ में महिला ने वह बात कबूल की जिसे सुनकर पुलिसकर्मी भी स्तब्ध रह गए। उसने बताया, कि उसके पांच बच्चे हैं, चार बेटे और सबसे छोटी 9 महीने की बेटी। पति लकवाग्रस्त है और वह खुद दिहाड़ी मज़दूरी करती है। परिवार का बोझ उठाना असंभव हो गया था। उसने बताया, कि जब बच्ची सो रही थी तब उसने उसे नाले में फेंक दिया।
बिहार से आए थे रोज़ी की तलाश में-
पुलिस के अनुसार यह परिवार बिहार के मधुबनी ज़िले का है और कई सालों से फरीदाबाद में काम की तलाश में रह रहा था। फरीदाबाद पुलिस के पीआरओ यशपाल ने बताया कि महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की जाँच जारी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतज़ार है।
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यह सिर्फ अपराध नहीं-
यह मामला सिर्फ एक मां के अपराध की कहानी नहीं है। यह उस व्यवस्था पर सवाल है, जो एक लाचार मां को इस हद तक पहुँचने देती है। लकवाग्रस्त पति, पाँच बच्चे, दिहाड़ी मज़दूरी और कोई सहारा नहीं। क्या इस त्रासदी को रोका जा सकता था अगर सरकारी सहायता या सामाजिक सुरक्षा का जाल मज़बूत होता?
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