Raghav Chadha: अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के लिए शुक्रवार का दिन किसी तूफान से कम नहीं रहा। पार्टी के राज्यसभा सांसद और पूर्व उपनेता राघव चड्ढा ने 15 साल का साथ छोड़ते हुए, BJP में शामिल होने का ऐलान कर दिया और यह अकेले नहीं, उनके साथ 6 और राज्यसभा सांसद भी भगवा खेमे में चले गए। दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राघव चड्ढा ने यह घोषणा की और साफ कहा, कि वे “गलत पार्टी में सही आदमी” थे।
कौन-कौन छोड़ गए AAP?
राघव चड्ढा के साथ संदीप पाठक, अशोक मित्तल, पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल ने AAP से किनारा कर लिया। यह आंकड़ा बेहद अहम है, AAP के राज्यसभा में कुल 10 सांसद हैं और इनमें से 7 ने पाला बदल लिया। यह दो-तिहाई से ज़्यादा का आंकड़ा है, जो दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचाता है। दिलचस्प बात यह है कि अशोक मित्तल को हाल ही में राघव चड्ढा की जगह राज्यसभा में AAP का उपनेता बनाया गया था और वे भी साथ चले गए।
VIDEO | Delhi: Rajya Sabha MP Raghav Chadha (@raghav_chadha) says, “Before entering politics, I was a practising Chartered Accountant (CA). Along with me on this platform were people from different fields, some were scientists, others were educationists. Today, those leaving the… pic.twitter.com/by2BOEiBMZ
— Press Trust of India (@PTI_News) April 24, 2026
क्यों हुए BJP में शामिल?
राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में AAP पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा, कि उनकी अपनी पार्टी ने उन्हें चुप कराया और वे सालों से महसूस कर रहे थे, कि वे गलत जगह हैं, अब वह बीजेपी के नेतृत्व में लोगों की आवाज़ उठांएंगे। एक पूर्व चार्टर्ड अकाउंटेंट से लेकर AAP के सबसे चमकदार चेहरों में से एक बनने तक का 15 साल का सफर यह सब याद करते हुए उनकी आवाज़ में भावुकता और गुस्सा दोनों थे।
दल-बदल कानून से कैसे बचेंगे ये सांसद?
भारतीय संविधान के दल-बदल विरोधी कानून के तहत अगर किसी दल के दो-तिहाई से ज़्यादा सांसद किसी दूसरे दल में विलय करते हैं, तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। AAP के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 का BJP में जाना इसी प्रावधान के दायरे में आता है। राघव चड्ढा ने कहा, कि सभी ज़रूरी दस्तावेज़ राज्यसभा के सभापति को सुबह ही सौंप दिए गए हैं।
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AAP के लिए अब तक का सबसे बड़ा संकट-
दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद पहले से ही दबाव में चल रही AAP के लिए यह एक और बड़ा झटका है। राज्यसभा में इतने बड़े पैमाने पर टूट ने पार्टी की संसदीय ताकत को व्यावहारिक रूप से खत्म कर दिया है। अब देखना होगा, कि केजरीवाल इस संकट से कैसे निपटते हैं।
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