Delhi LPG Crisis: दिल्ली की सड़कों पर सुबह की चाय, शाम के मोमो और रात के परांठे, यह सब उस छोटे से सिलेंडर पर टिके हैं, जिसे हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन अब यही सिलेंडर हज़ारों रेहड़ी-पटरी वालों की नींद उड़ा रहा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब सात समंदर पार दिल्ली की गलियों तक पहुंच चुका है और इसकी मार सबसे पहले उन्हीं पर पड़ रही है, जिनके पास न बड़ा बजट है और न कोई बैकअप।
हज़ारों छोटे कारोबार दांव पर-
दिल्ली में चाय की रेड़ी से लेकर, तंदूर, ढाबा और मोमो के ठेले तक सब LPG सिलेंडर पर चलते हैं। जब से पश्चिम एशिया के हालात बिगड़े हैं, दुनियाभर में एनर्जी सप्लाई और शिपिंग रुट्स प्रभावित हुए हैं, जिसका सीधा असर भारत में रसोई गैस की उपलब्धता पर पड़ रहा है। केंद्र सरकार ने घरेलू LPG सप्लाई को प्राथमिकता दी है, जिससे कमर्शियल सिलेंडर पर निर्भर छोटे दुकानदारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। बड़े रेस्टोरेंट के पास स्टॉक रखने की जगह और पैसा होता है, लेकिन ये छोटे वाले तो रोज़ की ज़रूरत के हिसाब से सिलेंडर लेते हैं। एक भी दिन की देरी उनकी दुकान बंद करा सकती है।
आज सिलेंडर नहीं मिला तो चाय नहीं बनेगी-
नोएडा सेक्टर 16 में भाई की चाय की दुकान चलाने वाले रोशन कुमार यादव की बात सुनेंगे, तो दिल भारी हो जाएगा। उन्होंने बताया, कि उनके पास आज बहुत कम गैस बची है और उनका एक दोस्त सिलेंडर लेने गया है, जिस पर आज की पूरी कमाई टिकी है। रोशन ने कहा, “ब्लैक मार्केट में भी सिलेंडर नहीं मिल रहा और जहां मिल रहा है, वहां कीमत 3100 रुपये तक पहुंच गई है। अगर आज सिलेंडर नहीं मिला, तो चाय बंद, बस पैकेज्ड फूड ही बेच पाएंगे।”
घरेलू सिलेंडर पर मजबूरी में टिकी दुकानें-
लाजपत नगर में चाय बेचने वाले आर के पाठक, जो उत्तर प्रदेश के गोंडा से आए हैं, एक 15 किलो के घरेलू सिलेंडर पर अपना छोटा स्टोव चलाते हैं। यह गैरकानूनी है, लेकिन इनफॉर्मल सेक्टर में यह बहुत आम है। क्योंकि कमर्शियल सिलेंडर इनकी पहुंच से बाहर है। पाठक ने कहा, “वैसे भी गर्मी शुरू होने पर चाय कम बिकती है, लोग ठंडे पेय पीने लगते हैं।
ऊपर से गैस महंगी हो गई, तो सीधी मार हम पर पड़ेगी। चाय का दाम बढ़ाएंगे तो कोई खरीदेगा नहीं।” उनके पास बस एक सिलेंडर बचा है, जो तीन-चार दिन चलेगा। उन्होंने यह भी कहा, कि दुकान चलाने के लिए सरकारी अधिकारियों को पैसे देने पड़ते हैं यानी मुसीबत हर तरफ से है।
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पैनिक बुकिंग से और बिगड़े हालात-
इस संकट ने दिल्ली में घरेलू स्तर पर भी हड़बड़ाहट पैदा कर दी है। लोग कमी के डर से एक साथ ढेर सारे सिलेंडर बुक करा रहे हैं, जिससे डिस्ट्रिब्यूशन सेंटर पर लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं और लोकल सप्लाई पर अचानक बहुत ज़्यादा दबाव आ गया है। कई डिस्ट्रिब्यूटर्स का कहना है, कि इसने हालात को और पेचीदा बना दिया है। जो सिलेंडर पहले आसानी से मिल जाता था, अब उसके लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
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