Biryani Restaurant Tax Scam: पिछले साल के आखिरी महीनों में हैदराबाद के कुछ मशहूर बिरयानी रेस्टोरेंट्स में आयकर विभाग के अधिकारी सामान्य जांच के लिए पहुंचे। कोई बड़ी छापेमारी नहीं थी, कोई हंगामा नहीं था। रसोई में काम चल रहा था, ग्राहक खाना खा रहे थे और बिलिंग काउंटर पर सब कुछ ठीक-ठाक दिख रहा था। लेकिन एक बात थी, जो अधिकारियों को खटकी रेस्तरां के अंदर बैठे ग्राहकों की संख्या और बिलिंग मशीन पर दर्ज संख्या में साफ अंतर था।
कुछ नकद बिल पल भर के लिए मशीन में दिखे और फिर अचानक गायब हो गए। ऊपर से हिसाब-किताब बिल्कुल साफ लग रहा था, लेकिन सॉफ्टवेयर के अंदर की जानकारी कुछ और ही कहानी बयां कर रही थी।
एक सॉफ्टवेयर, लाखों रेस्ट्रों-
शुरुआत में अधिकारियों को लगा, कि यह कोई स्थानीय चालाकी है। लेकिन जब पता चला, कि इन सभी रेस्टोरेंट्स में एक ही बिलिंग सॉफ्टवेयर इस्तेमाल हो रहा है, तो जांच की दिशा पूरी तरह पलट गई। जब अधिकारियों ने उस सॉफ्टवेयर कंपनी के अहमदाबाद स्थित मुख्य सर्वर तक पहुंच बनाई, तो उनके हाथ लगा करीब 60 टेराबाइट का बिलिंग डेटा, जो पूरे देश के एक लाख से ज़्यादा रेस्टोरेंट्स का था।
हैदराबाद की जांच प्रयोगशाला में विशेषज्ञों ने उन हटाए गए, बिलों को फिर से जोड़ना शुरू किया। हर लेन-देन ने सिस्टम में एक निशान छोड़ा था, चाहे उसे मिटाया ही क्यों न गया हो। बिरयानी के एक छोटे से हिसाब की गड़बड़ी अब पूरे देश की जांच बन चुकी थी।
AI ने किया वो काम जो इंसानी आंखें नहीं कर सकी-
AI की मदद से उन डिजिटल निशानों को पढ़ा गया और गायब बिलों को दोबारा तैयार किया गया। जो सामने आया वो चौंकाने वाला था। पिछले छह सालों में देशभर के रेस्टोरेंट्स ने करीब ₹2.43 लाख करोड़ के बिल बनाए थे, लेकिन इनमें से ₹13,000 करोड़ से ज़्यादा के बिल चुपचाप मिटा दिए गए।
कुछ रेस्टोरेंट्स ने रोज़ाना थोड़े-थोड़े नकद बिल हटाए, तो कुछ ने पूरे तीस दिनों के हिसाब एक झटके में साफ कर दिए। कुछ व्यवसायियों ने सॉफ्टवेयर में सारे रिकॉर्ड रखे, लेकिन कर विभाग को बहुत कम कमाई दिखाई। मंशा सबकी एक ही थी, कमाई कम दिखाओ और सरकार को कम कर चुकाओ।
किस राज्य में कितना हुआ घपला?
राज्यवार आंकड़े और भी हैरान करने वाले हैं। कर्नाटक में सबसे ज़्यादा करीब ₹2,000 करोड़ के लेन-देन मिटाए गए। तेलंगाना में ₹1,500 करोड़ और तमिलनाडु, महाराष्ट्र तथा गुजरात भी पीछे नहीं रहे। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 3,734 पैन धारकों की जांच में ₹5,000 करोड़ से ज़्यादा की छुपाई गई बिक्री सामने आई। केवल चालीस रेस्तरांओं के नमूने में ही करीब ₹400 करोड़ की अघोषित कमाई मिली, यानी कुछ रेस्तरां अपनी करीब एक चौथाई कमाई छुपा रहे थे।
ये भी पढ़ें- कौन हैं 8 साल के Ranvir Sachdeva? जिन्होंने India AI Impact Summit 2026 में किया सबको हैरान
डिजिटल रिकॉर्ड मिटाना अब सुरक्षित नहीं-
जाने-माने वित्तीय सलाहकार सार्थक आहूजा ने इस पूरे मामले पर कहा, कि आयकर विभाग अब बिल्कुल सटीक तरीके से देख सकता है, कि कौन बिल हटा रहा है और हिसाब में हेरफेर कर रहा है। उन्होंने बताया, कि पौने दो लाख रेस्टोरेंट्स के 2019 से अब तक के आंकड़ों में पाया गया, कि औसतन 27 फीसदी बिक्री छुपाई जा रही थी।
ये भी पढ़ें- कुत्ते की पिटाई से टूटी शादी, दूल्हे वालों की हरकत से दुल्हन ने किया शादी से इनकार
कुल मिलाकर करीब ₹70,000 करोड़ की छुपी हुई कमाई सामने आई है। आहूजा ने साफ चेताया, कि क्लाउड पर आधारित सिस्टम भी जांचकर्ताओं के लिए अपने निशान छोड़ता है, डिजिटल रिकॉर्ड मिटाना अब कोई बचाव का रास्ता नहीं रहा।



