Great India Place Mall: एक जमाना था, जब नोएडा का द ग्रेट इंडिया प्लेस यानी जीआईपी मॉल एनसीआर की शान हुआ करता था। वीकेंड पर फैमिली आउटिंग का मतलब जीआईपी जाना था। लेकिन आज यही मॉल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, मगर गलत वजहों से।
इंस्टाग्राम रील्स में खाली कॉरिडोर, बंद पड़ी दुकानें और फूड कोर्ट में ग्राहकों से ज्यादा स्टाफ दिख रहे हैं। जो मॉल कभी भीड़ से गुलजार रहता था, वो अब सुनसान नजर आ रहा है। एनसीआर के लोगों के लिए यह मानना मुश्किल है, कि यह वही मॉल है, जिसने एक दौर में वीकेंड की परिभाषा बदल दी थी।
शुरुआत में था जबरदस्त क्रेज-
जब साल 2007 में ग्रेट इंडिया प्लेस खुला, तो यह एक रिटेल चमत्कार जैसा था। यूनिटेक ग्रुप और अप्पू घर ग्रुप ने मिलकर इसे एंटरटेनमेंट सिटी लिमिटेड के तहत बनाया था। साठ लाख स्क्वायर फीट में फैले इस मॉल में 230 से ज्यादा आउटलेट्स, मल्टीप्लेक्स, बॉलिंग एलीज और आसान मेट्रो कनेक्टिविटी थी। यह सिर्फ मॉल नहीं, बल्कि फैमिली डेस्टिनेशन बन गया था। पैंटालून्स, शॉपर्स स्टॉप और बिग बाजार जैसे बड़े ब्रांड्स यहां मौजूद थे। वर्ल्ड्स ऑफ वंडर और किडजानिया भी पास में थे। जीआईपी सिर्फ शॉपिंग नहीं, एक परंपरा बन चुका था। इस मॉल में दिन में करीब तीस हजार विजिटर्स आते थे।
कॉम्पटीशन ने गेम बदला-
असली मोड़ 2017 में आया जब डीएलएफ मॉल ऑफ इंडिया खुला, जो जीआईपी से बस कुछ मिनटों की दूरी पर था। बड़ा, चमकदार और ज्यादा आकर्षक डीएलएफ मॉल में इंटरनेशनल ब्रांड्स थे और शॉपिंग का अनुभव बिल्कुल मॉडर्न था। इसी समय जीआईपी की कमजोरी भी सामने आने लगी। नए मॉल्स में जहां जगह लीज पर दी जाती है, वहीं जीआईपी की कई यूनिट्स इंडिविजुअल निवेशकों को बेच दी गई थीं। इस बिखरी हुई मालिकाना हक की वजह से टेनेंट प्लानिंग मुश्किल हो गई। जैसे-जैसे दुकानें बंद होती गईं, उन्हें बदलना धीमा और मुश्किल होता गया।
कोविड ने लगाई आखिरी ठोकर-
अगर कंपटीशन ने जीआईपी को कमजोर किया, तो महामारी ने इसे तोड़ दिया। लंबे लॉकडाउन ने रेवेन्यू खत्म कर दिया और कई ब्रांड्स वापस ही नहीं लौटे। 2022 तक मॉल के पूरे सेक्शन खाली नजर आने लगे। पर्दे के पीछे कर्ज बढ़ता गया। 2023 तक एंटरटेनमेंट सिटी लिमिटेड पर एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज हो गया। 147 एकड़ के इस कॉम्प्लेक्स को बेचने की बातें होने लगीं। डीएस ग्रुप की तरफ से दो हजार करोड़ की बोली की खबरें आईं, लेकिन कोई डील नहीं हो पाई।
कानूनी झंझट और इमेज का नुकसान-
2024 में एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने इंटरनेशनल रिक्रिएशन एंड अम्यूजमेंट लिमिटेड से जुड़ी करीब 291 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी अटैच कर दी। हालांकि मॉल बंद नहीं हुआ, लेकिन यह खबरें इमेज को और नुकसान पहुंचाने के लिए काफी थीं।
क्या जीआईपी पूरी तरह खत्म हो गया-
बिल्कुल नहीं। वायरल घोस्ट मॉल कहानी के बावजूद, अभी भी दो सौ से ज्यादा ब्रांड्स यहां काम कर रहे हैं। जुडियो, रिलायंस ट्रेंड्स, एडिडास और मैकडॉनल्ड्स जैसी दुकानें वीकेंड पर अच्छी भीड़ देखती हैं। मॉल ने अब प्रीमियम पोजिशनिंग छोड़कर वैल्यू रिटेल और मास मार्केट की तरफ रुख किया है।
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जीआईपी का पतन एक घटना की वजह से नहीं हुआ। यह कई चीजों का मिश्रण था, तगड़ा कंपटीशन, बिखरी मालिकाना हक, आधुनिकीकरण में कमी, भारी कर्ज और महामारी का झटका। लोकेशन अभी भी शानदार है और लोगों में नॉस्टेल्जिया भी है। लेकिन बिना मालिकाना हक की स्पष्टता और पूंजी के बिना यह मॉल और पुराना होता जाएगा, जबकि नए रिटेल हब आगे बढ़ते रहेंगे। जीआईपी की कहानी भारत के पहली पीढ़ी के मॉल्स की कहानी है, जिन्होंने शुरुआत में धूम मचाई, लेकिन बदलते रिटेल में खुद को फिर से ईजाद करने में संघर्ष किया।
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