Basant Panchami 2026
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    Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी का पर्व हर साल बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से मां सरस्वती को समर्पित है, जो ज्ञान, विद्या और कला की देवी मानी जाती हैं। इस साल बसंत पंचमी का त्योहार और भी खास होने वाला है, क्योंकि इस दिन एक अद्भुत ग्रह योग बन रहा है।

    चंद्रमा मीन राशि में गोचर करेंगे और बृहस्पति चंद्रमा से चौथे भाव में स्थित होंगे, जिससे गजकेसरी योग का निर्माण हो रहा है। यह संयोग विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए बेहद शुभ माना जाता है। साथ ही यह पर्व वसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक है, जब प्रकृति नए रंगों में सज जाती है।

    कब है बसंत पंचमी 2026?

    हिंदू पंचांग के अनुसार माघ शुक्ल पंचमी तिथि 22 जनवरी, गुरुवार को सुबह 2 बजकर 29 मिनट पर शुरू होगी और 23 जनवरी, शुक्रवार को रात 1 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाएगी। मान्यता है, कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से ज्ञान, सृजनात्मकता और बुद्धि में वृद्धि होती है और भक्तों को मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    गजकेसरी योग का विशेष संयोग-

    इस बार की बसंत पंचमी में एक खास बात यह है, कि 23 जनवरी, शुक्रवार को चंद्रमा मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इस समय बृहस्पति चंद्रमा से चौथे भाव में होंगे, जिससे गजकेसरी योग बनेगा। जब चंद्रमा गुरु की राशि में स्थित हो और गुरु चंद्रमा से केंद्र में हों, तो यह योग अत्यंत शुभफलदायी माना जाता है। यह विशेष तौर पर छात्रों के लिए बहुत अच्छा है। इस दिन सुबह 8 बजकर 33 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट तक का समय शिक्षा संबंधी कार्यों की शुरुआत के लिए सबसे उपयुक्त रहेगा।

    सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त-

    बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा का सबसे शुभ समय सुबह 9 बजकर 53 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। इस दिन लोग अपने घरों, कॉलेजों, स्कूलों और कार्यस्थलों पर विधि-विधान से मां सरस्वती की आराधना करते हैं और विद्या एवं बुद्धि की कामना करते हैं। पूजा के दौरान देवी को सिंदूर, श्रृंगार की वस्तुएं और गुलाल अर्पित किया जाता है। लाभ चौघड़िया सुबह 8 बजकर 33 मिनट से 9 बजकर 53 मिनट तक और अमृत चौघड़िया सुबह 9 बजकर 53 मिनट से 11 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।

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    वसंत ऋतु का आगमन-

    बसंत पंचमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह वसंत ऋतु की आधिकारिक शुरुआत का भी प्रतीक है। इस समय प्रकृति में नया जीवन आता है, फूल खिलते हैं और चारों ओर हरियाली छा जाती है। यह समय नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

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    By sumit

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