Viral Video: वाराणसी में बन रहा देश का पहला अर्बन एरियल केबल कार सिस्टम, यानी काशी रोपवे, इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है। वजह है एक वायरल वीडियो, जिसमें ट्रायल रन के दौरान रोपवे का केबिन तेज हवा में झूलता हुआ नजर आ रहा है। इस वीडियो ने लोगों के मन में सवाल खड़े कर दिए हैं, क्या यह सफर वाकई सुरक्षित होगा या फिर श्रद्धालुओं और टूरिस्ट्स को डर के साये में यात्रा करनी पड़ेगी?
कैंट स्टेशन से गोदौलिया तक 16 मिनट का सफर-
काशी रोपवे परियोजना वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन को गोदौलिया चौराहे से जोड़ती है, जो काशी विश्वनाथ मंदिर के बेहद करीब है। अभी इस रूट पर पहुंचने में लगभग एक घंटा लग जाता है, लेकिन रोपवे चालू होने के बाद यही दूरी सिर्फ 16 मिनट में तय की जा सकेगी। सरकार का दावा है, कि इससे न सिर्फ ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी बड़ी सुविधा मिलेगी।
This is the new ropeway made at the cost of Rs 815 crore in Banaras. Hawa ka jhonka is making it swivel so badly. Total distance of ropeway is 3.85kms and Imagine the condition of people travelling in it. You will be dying every minute out of fear. #Varanasi pic.twitter.com/6FqWwKF53A
— ηᎥ†Ꭵղ (@nkk_123) January 6, 2026
तेज हवा में झूलता केबिन और बढ़ी चिंता-
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यूज़र नितिन (@nkk_123) द्वारा शेयर किए गए, वीडियो में 3.85 किलोमीटर लंबे रोपवे ट्रैक पर केबिन तेज हवा के कारण हिलता-डुलता दिख रहा है। वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया और अब तक इसे 1.56 लाख से ज्यादा लोग देख चुके हैं। कई यूजर्स ने इसे “डरावना” बताते हुए यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल उठाए। नितिन ने लिखा, कि 815 करोड़ रुपये की लागत से बने इस प्रोजेक्ट में हवा का एक झोंका ही केबिन को बुरी तरह झुला रहा है, ऐसे में अंदर बैठे लोगों की हालत क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
अधिकारियों का जवाब-
हालांकि, अधिकारियों ने इन सभी आशंकाओं को खारिज किया है। उनका कहना है, कि वीडियो में दिख रहा, केबिन का घूमना या झूलना असल में रोपवे के डिजाइन का हिस्सा है। केबिन्स को इस तरह इंजीनियर किया गया है, कि वे हवा के दबाव के साथ खुद को एडजस्ट कर सकें, न कि उसका विरोध करें। इससे स्ट्रक्चर पर कम दबाव पड़ता है और सिस्टम ज्यादा सुरक्षित रहता है। अधिकारियों ने यह भी बताया, कि यह तकनीक यूरोपीय सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के मुताबिक है, जो दुनिया के कई देशों में इस्तेमाल हो रही है।
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ट्रायल फेज में, अब तक कोई हादसा नहीं-
815 करोड़ रुपये की यह परियोजना अक्टूबर 2025 में ट्रायल फेज में थी। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक किसी भी तरह की सेफ्टी इंसिडेंट की रिपोर्ट नहीं मिली है। उनका कहना है, कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो अधूरी जानकारी के साथ डर फैलाने जैसा है। रोपवे के पूरी तरह ऑपरेशनल होने से पहले कई और सेफ्टी टेस्ट किए जाएंगे।
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