Canara Bank Robbery: महाराष्ट्र के भंडारा जिले में इस हफ्ते एक ऐसी चौंकाने वाली घटना सामने आई, जिसने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए। जिस बैंक अधिकारी पर लोगों के पैसों की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वही चोर निकला। सितासवांगी के चिखला ब्रांच में कैनरा बैंक के 32 वर्षीय असिस्टेंट मैनेजर मयूर नेपाले ने स्ट्रांगरूम से 1.58 करोड़ रुपये चुरा लिए। पुलिस ने 24 घंटे के अंदर उसे गिरफ्तार कर लिया। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कोई नकाबपोश गैंग द्वारा की गई ड्रामेटिक डकैती नहीं थी, बल्कि कर्ज में डूबे एक व्हाइट कॉलर कर्मचारी द्वारा चुपचाप और सावधानी से की गई चोरी थी।
ऑनलाइन बेटिंग के कर्ज ने बना दिया चोर-
पुलिस के अनुसार, नेपाले 80 लाख रुपये से अधिक के कर्ज में फंसा हुआ था। इस कर्ज में ऑनलाइन बेटिंग और जुए में गंवाए गए 30 लाख रुपये, 12 लाख का पर्सनल लोन, 8.5 लाख का कार लोन, 3.5 लाख का एजुकेशन लोन, 3 लाख का पेटीएम लोन और प्राइवेट साहूकारों से लिए गए 20 लाख रुपये शामिल थे। बैंकिंग एग्जाम क्लियर करने और यूपीएससी की तैयारी के बावजूद वह अपनी लत से मुक्त नहीं हो सका। पुलिस को शक है, कि वह पहले भी कई चोरियों के पीछे था, जिसमें उसी ब्रांच में अपने पिता की 80 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट का गबन भी शामिल है।
कर्नाटक गोल्ड हाइस्ट और ऑनलाइन ट्यूटोरियल से ली प्रेरणा-
जांचकर्ताओं ने पाया, कि नेपाले ने इस साल की शुरुआत में कर्नाटक में हुई एक सीनियर अधिकारी द्वारा की गई 58 करोड़ रुपये की गोल्ड चोरी से आइडिया लिया था। इसके अलावा उसने ऑनलाइन वीडियो देखकर सीखा कि कैसे तोड़फोड़ करनी है, फिंगरप्रिंट कैसे नहीं छोड़ने हैं और सीसीटीवी सबूतों को कैसे नष्ट करना है। यह कोई अचानक का इम्पल्सिव एक्ट नहीं था, बल्कि कई दिनों की प्लानिंग के बाद किया गया सोलो हाइस्ट था। यह दिखाता है कि इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी का गलत इस्तेमाल कितना खतरनाक हो सकता है।
चोरी की तैयारी शुरू की-
17 नवंबर की रात को नेपाले नागपुर शहर गया, जहां वह अपने परिवार के साथ रहता था। वहां उसने चार बैग खरीदे। पुलिस का कहना है कि बाद में इन्हीं बैग में चुराया गया कैश भरा गया। इसके बाद वह 18 नवंबर की सुबह भंडारा वापस लौटा, लेकिन इस बार उसके दिमाग में पूरी योजना तैयार थी, कि कैसे बिना शक पैदा किए चोरी को अंजाम देना है।
कैसे अंजाम दी चोरी-
18 नवंबर की तड़के नेपाले अपने जुपिटर स्कूटर पर बैंक ब्रांच पहुंचा। चोरी को बाहर से की गई डकैती जैसा दिखाने के लिए उसने कई कदम उठाए। उसने बिजली की लाइनें काटीं, सीसीटीवी कैमरों को डिसेबल किया, डुप्लीकेट चाबियों का इस्तेमाल करके स्ट्रांगरूम में घुसा, अपना चेहरा छुपाने के लिए मंकी कैप पहना, फिंगरप्रिंट्स पोंछे और बॉडी ओडर को छुपाने की कोशिश की। बाहर से जबरन एंट्री दिखाने के लिए उसने चैनल गेट और शटर लॉक तोड़ दिया।
स्ट्रांगरूम के अंदर उसने कैश चेस्ट खाली कर दिए और डिजिटल सबूतों को नष्ट करने के लिए डीवीआर और कैमरे हटा दिए। असिस्टेंट मैनेजर होने के नाते उसके पास स्पेशल एक्सेस भी था। महज कुछ दिन पहले 13 नवंबर को ही उसने आरबीआई से अतिरिक्त 85 लाख रुपये की मांग की थी, यह कहते हुए कि यह इमरजेंसी के लिए जरूरी है। इससे ब्रांच में कैश की सप्लाई सामान्य से लगभग पांच गुना बढ़ गई थी। यह साफ दिखाता है, कि उसने कितनी चालाकी से पूरी योजना बनाई थी।
सीसीटीवी ने पकड़ लिया वो जो वो छुपाना चाहता था-
हालांकि उसने ब्रांच के अंदर के कैमरों को डिसेबल कर दिया था, लेकिन उसे यह अंदाजा नहीं था कि पास की एक लोकेशन से एक बाहरी सीसीटीवी कैमरा अभी भी काम कर रहा था। उस कैमरे ने साफ तौर पर उसे खाली बैग के साथ स्कूटर पर आते हुए कैद कर लिया। वही वाहन और उसके फिजिकल फीचर्स शक पैदा करने के लिए काफी थे।
जब 18 नवंबर की सुबह स्टाफ पहुंचा और टूटे हुए ताले और गायब कैश देखा, तो उन्होंने गोबरवाही पुलिस को सूचित किया। सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस नूरुल हसन ने तुरंत 10 स्पेशल टीमें बनाईं, जिनमें साइबर एक्सपर्ट्स और लोकल क्राइम ब्रांच यूनिट्स शामिल थीं। चूंकि केवल एक इनसाइडर ही चाबियों और कैमरों की सटीक लोकेशन जान सकता था, इसलिए जांचकर्ताओं ने स्टाफ की मूवमेंट्स चेक करना शुरू किया।
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खुद की गलतियों ने करवाया पर्दाफाश-
नेपाले का 17 नवंबर का बर्ताव असामान्य था। उसने कई चक्कर लगाए और फिर अचानक छुट्टी के लिए अप्लाई किया, यह कहते हुए, कि उसे नागपुर में ट्रेनिंग है। और भी ज्यादा संदिग्ध बात यह थी, कि पैसे चुराकर और उसे नागपुर में अपनी कार में छुपाने के बाद, वह अगली सुबह अपने स्कूटर पर भंडारा वापस लौटा, वही स्कूटर जो सीसीटीवी में दिखा था। उसने पुलिस को बताया, कि वह जांच में मदद करने आया है, लेकिन अधिकारियों ने जल्दी ही उसके स्कूटर को फुटेज से मैच कर लिया।
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