Criminal MP’s Bill: बुधवार को लोकसभा में ऐसा तूफान मचा, कि सदन की कार्यवाही ही ठप हो गई। जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीन कॉन्ट्रोवर्शियल बिल पेश किए, तो विपक्षी सांसदों ने इन बिलों की कॉपिज़ को फाड़ डाला और सदन के बीच में जाकर जमकर नारेबाजी की। ये बिल एक बेहद सेंसिटिव मुद्दे पर हैं, यदि कोई प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री किसी गंभीर आरोप में 30 दिन तक जेल में रहे, तो उसे अपने पद से हटना होगा।
अमित शाह ने विपक्ष की आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा, कि हम इतने बेशर्म नहीं हो सकते, कि गंभीर आरोपों का सामना करते हुए भी संवैधानिक पदों पर बने रहें। उन्होंने आश्वासन दिया, कि इन बिलों को संसद की जॉइंट कमेटी के पास भेजा जाएगा, जहां दोनों सदनों के सदस्यों को अपने सुझाव देने का मौका मिलेगा।
विपक्ष का तीखा विरोध-
AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस के मनीष तिवारी और के.सी. वेणुगोपाल जैसे दिग्गज नेताओं ने इन बिलों का तीखा विरोध किया। उनका कहना था, कि ये कानून संविधान और संघीयता के खिलाफ हैं। लगातार हो रहे शोर-शराबे के बीच दोपहर 3 बजे तक के लिए सदन को स्थगित करना पड़ा।
Opposition MPs shamelessly insulted Parliament by tearing & throwing the bill in front of Union Home Minister, Shri @AmitShah ji.
— Vishnu Vardhan Reddy (@SVishnuReddy) August 20, 2025
If the law is meant to crack down on criminals, why are they rattled?
Opposition has once again exposed itself as the protector of criminals rather… pic.twitter.com/tSWnRD1UUo
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने इन बिलों को “पूरी तरह से दमनकारी” बताया। उनका कहना था, कि कल आप किसी भी मुख्यमंत्री पर कोई भी केस लगाकर उसे 30 दिन तक अरेस्ट करा सकते हैं और बिना कन्विक्शन के वह मुख्यमंत्री नहीं रह जाएगा। यह बिल्कुल एंटी-कॉन्टिट्यूशनल और अनडैमोक्रेटिक है।
हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने BJP सरकार पर देश को “पुलिस स्टेट” बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, कि यह बिल अनकॉन्टियूशनल है और प्रधानमंत्री को कौन गिरफ्तार करेगा। उनका कहना था कि BJP भूल रही है, कि सत्ता हमेशा के लिए नहीं होती।
क्या हैं इन तीनों बिलों के प्रावधान?
तीनों बिल – Government of Union Territories (Amendment) Bill 2025, Constitution (One Hundred And Thirtieth Amendment) Bill 2025, और Jammu and Kashmir Reorganisation (Amendment) Bill 2025 में एक प्रावधान है। इसके अनुसार यदि कोई प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री लगातार 30 दिन तक किसी गंभीर क्रिमिनल चार्ज में गिरफ्तार रहे, तो 31वें दिन उसका पद चला जाएगा।
बिल के मुताबिक, अगर कोई मंत्री ऐसे अपराध के आरोप में 30 दिन लगातार हिरासत में रहे, जिसकी सजा पांच साल या अधिक हो सकती है, तो राष्ट्रपति उसे प्रधानमंत्री की सलाह पर पद से हटा देंगे। यह दिलचस्प है, कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और तमिलनाडु के मंत्री वी. सेंथिल बालाजी ने गिरफ्तारी के बाद भी अपने पदों से इस्तीफा नहीं दिया था।
Joint Committee में होगी विस्तृत चर्चा-
लगातार हो रहे प्रोटेस्ट के बीच अमित शाह ने सदन को आश्वासन दिया, कि इन बिलों को 31 सदस्यीय जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के पास भेजा जाएगा। यह कमेटी अगले सेशन से पहले अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। इससे विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के सदस्यों को अपने विचार रखने का मौका मिलेगा।
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BJP का पक्ष-
BJP सांसद मनन कुमार मिश्रा ने इस बिल का समर्थन करते हुए कहा, कि सरकार एक ज़रुरी बिल ला रही है जिसमें 30 दिन से ज्यादा जेल में रहने वालों को मिनिस्ट्रियल पोस्ट पर बने रहने की अनुमति नहीं होगी। उनका कहना था, कि इससे ज्यादा महत्वपूर्ण कोई काम नहीं हो सकता, लेकिन विपक्ष संसद में बाधा डालना चाहता है।
तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी ने सरकार पर सिर्फ पावर, वेल्ठ और कंट्रोल में दिलचस्पी रखने का आरोप लगाया। यह अभी शुरुआत है और आने वाले दिनों में जॉइंट कमेटी की बैठकों में इन बिलों पर गहरी चर्चा होगी।
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