Swami Avimukteshwaranand: प्रयागराज में शनिवार को एक बड़ी लीगल खबर सामने आई। यहां की स्पेशल POCSO कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरि के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों में FIR दर्ज करने का सीधा आदेश पुलिस को दे दिया है। ADJ (POCSO Act) विनोद कुमार चौरसिया ने यह आदेश जारी करते हुए मामले की गहन जांच के भी निर्देश दिए हैं। यह FIR झूंसी थाने में दर्ज की जाएगी।
किसने दाखिल की एप्लिकेशन?
यह पूरा मामला तब सामने आया, जब शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने धारा 173(4) के तहत एक एप्लिकेशन दाखिल की और कड़ी कार्रवाई की मांग की। ANI के मुताबिक, कोर्ट ने इस एप्लिकेशन को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को FIR और गहन जांच के आदेश दे दिए। यह खबर धार्मिक और राजनीतिक हलकों में तेजी से फैल गई है।
माघ मेला विवाद से जुड़ा पुराना बवाल-
दरअसल स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पिछले कुछ हफ्तों से काफी चर्चा में रहे हैं। 18 जनवरी को माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के मौके पर वे पालकी में सवार होकर संगम की तरफ जा रहे थे, लेकिन भारी भीड़ को देखते हुए अधिकारियों ने उन्हें पालकी से उतरकर पैदल चलने को कहा। इस बात पर विवाद इतना बढ़ा, कि स्वामीजी के समर्थकों ने पोंटून ब्रिज की बैरिकेडिंग तोड़ दी, जिससे भीड़ मैनेज करना मुश्किल हो गया।
11 दिन का धरना और सियासी भूचाल-
इसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य कैंप के बाहर धरने पर बैठ गए और माफी व सम्मानजनक एस्कोर्ट की मांग करने लगे। उन्होंने वाराणसी में मीडिया से बात करते हुए कहा, कि 11 दिनों के धरने के दौरान कोई भी अधिकारी उनसे स्नान करवाने नहीं आया।
इसलिए अब वे अगले साल माघ मेले में जाकर सम्मान के साथ स्नान करेंगे। मेला प्रशासन ने भी उनके जवाब में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद के इस्तेमाल पर नोटिस जारी किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट में पैंडिंग सिविल अपील का हवाला दिया गया।
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इस्तीफों और कांग्रेस की एंट्री से मामला हुआ बड़ा-
इस पूरे विवाद ने प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी हलचल मचा दी। UP GST डिपार्टमेंट के डिप्यूटी कमीश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने मोरल ग्राउंड्स पर इस्तीफा दे दिया, वहीं बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी पद छोड़ दिया। कांग्रेस पार्टी ने इसे संत के अपमान का मामला बताते हुए राज्यपाल से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की और अब POCSO कोर्ट के इस आदेश के बाद यह पूरा मामला एक नए और गंभीर मोड़ पर आ खड़ा हुआ है।
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