New Toll System: भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों पर जल्द ही एक नई क्रांतिकारी टोल वसूली व्यवस्था शुरू होने जा रही है। केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ‘ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकॉग्निशन’ (ANPR) सिस्टम लागू करने की तैयारी में है, जिससे टोल प्लाजा पर लंबी कतारों में इंतजार करने की समस्या से छुटकारा मिलेगा। इस नए सिस्टम में अत्याधुनिक कैमरे वाहन की नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे और बिना रुके टोल राशि फास्टैग अकाउंट से कट जाएगी।
New Toll System हाइवे पर कैसे काम करेगा?
नए ANPR सिस्टम में वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। हाइवे पर लगे आधुनिक कैमरे चलते वाहन की नंबर प्लेट को स्कैन कर लेंगे और सिस्टम तुरंत फास्टैग अकाउंट से टोल राशि ट्रांसफर कर देगा। यह व्यवस्था मौजूदा फास्टैग सिस्टम से अलग है, जिसमें वाहन को टोल बूथ के पास धीमा करके रुकना पड़ता है और फिर फास्टैग को स्कैन करके टोल राशि काटी जाती है।
परिवहन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “ANPR सिस्टम एक गेम-चेंजर साबित होगा। इससे न सिर्फ टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारें खत्म होंगी, बल्कि ईंधन की भी बचत होगी और प्रदूषण कम होगा।”
New Toll System टोल प्लाजा पर लगने वाली कतारें होंगी खत्म-
नए सिस्टम के लागू होने से राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा की मौजूदा व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी। फास्टैग के बावजूद टोल प्लाजा पर अक्सर लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी होती है और समय की बर्बादी होती है।
एक अनुमान के अनुसार, भारत में टोल प्लाजा पर वाहनों के इंतजार के कारण हर साल लगभग 12,000 करोड़ रुपये का ईंधन बर्बाद होता है। नए ANPR सिस्टम से इस नुकसान को कम किया जा सकेगा और यात्री बिना रुके अपनी मंजिल तक पहुंच सकेंगे। परिवहन इंजीनियर राहुल शर्मा बताते हैं, “यह सिस्टम न सिर्फ टोल कलेक्शन को स्मार्ट बनाएगा, बल्कि ट्रैफिक मैनेजमेंट में भी सुधार करेगा। गाड़ियों को रुकने की जरूरत नहीं होगी, जिससे ट्रैफिक फ्लो स्मूथ रहेगा और जाम की समस्या नहीं होगी।”
New Toll System गलत टोल कटने की समस्या भी होगी दूर-
साल 2024 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर गलत टोल कटने के करीब 12.55 लाख मामलों में नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) को रिफंड देना पड़ा। नई ANPR तकनीक से इस समस्या को भी दूर किया जा सकेगा। इसमें सटीक नंबर प्लेट पहचान होगी और गलत टोल कटने की संभावना नहीं रहेगी।
परिवहन मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया, “नई तकनीक में AI और मशीन लर्निंग का उपयोग किया गया है, जो नंबर प्लेट की पहचान में 99.9% सटीक है। इससे गलत टोल कटने की समस्या से छुटकारा मिलेगा और उपभोक्ताओं को रिफंड के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।”
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर पहले से लागू है सिस्टम-
भारत में ANPR सिस्टम का परीक्षण दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर पहले से ही सफलतापूर्वक चल रहा है। यहां गैंट्री आधारित टोल सिस्टम में एडवांस कैमरों के माध्यम से टोल राशि वसूली जा रही है। वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ती और वे बिना रुके अपनी यात्रा जारी रख सकते हैं। प्रतिदिन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से लगभग 50,000 वाहन गुजरते हैं, और ANPR सिस्टम की वजह से यहां ट्रैफिक फ्लो स्मूथ रहता है। इस सफलता से प्रेरित होकर अब सरकार इसे देशभर के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू करने की योजना बना रही है।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
वर्तमान फास्टैग सिस्टम रेडियो फ्रिक्वेंसी आधारित है, जिसमें सेंसर फास्टैग को स्कैन करता है और फिर टोल राशि कटती है। इसके लिए वाहन को टोल बूथ पर रुकना पड़ता है। लेकिन नए ANPR सिस्टम में टोल प्लाजा पर लगे कैमरे चलते वाहन की नंबर प्लेट की फोटो क्लिक कर लेंगे। नंबर प्लेट फास्टैग अकाउंट से लिंक रहेगी, और इस तरह खुदबखुद टोल राशि कट जाएगी।
तकनीकी विशेषज्ञ अमित गुप्ता कहते हैं, “ANPR तकनीक में हाई-रेजोल्यूशन कैमरे और AI का उपयोग किया जाता है, जो किसी भी मौसम या रोशनी में नंबर प्लेट को सटीक पहचान सकते हैं। यह सिस्टम प्रति घंटा 120 किमी की स्पीड तक वाहनों की पहचान कर सकता है।”
देश में कितने हैं टोल प्लाजा?
भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई लगभग 1.47 लाख किलोमीटर है। इसके अलावा, एक्सप्रेस-वे की लंबाई करीब 4 हजार किलोमीटर है। देशभर में कुल 1063 टोल प्लाजा मौजूद हैं, जिनमें से राजस्थान में अकेले 142 टोल प्लाजा हैं। इन टोल प्लाजा से हर दिन लगभग 12-15 लाख वाहन गुजरते हैं। ANPR सिस्टम लागू होने से इन सभी टोल प्लाजा पर कतारें नहीं लगेंगी और यात्री बिना रुके अपनी यात्रा पूरी कर सकेंगे। इससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।
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अन्य देशों में है सफल-
ANPR सिस्टम पहले से ही कई विकसित देशों जैसे सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया में सफलतापूर्वक चल रहा है। सिंगापुर में इलेक्ट्रॉनिक रोड प्राइसिंग (ERP) सिस्टम के रूप में यह तकनीक लागू है, जिससे शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या काफी कम हो गई है। भारत में भी इस सिस्टम के लागू होने से न सिर्फ टोल कलेक्शन में पारदर्शिता आएगी, बल्कि राजमार्गों पर यात्रा करना भी आसान हो जाएगा।
परिवहन मंत्रालय के अनुसार, नए सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और आने वाले 2-3 वर्षों में सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर यह सिस्टम शुरू हो जाएगा। इससे टोल कलेक्शन सिस्टम में क्रांतिकारी बदलाव आएगा और यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा।
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