Punjab Pind Clinic Recruitment
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    Punjab Pind Clinic Recruitment: सोमवार की सुबह पंजाब के संगरूर में सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर जो नज़ारा था, वह किसी भी सरकार की आंखें खोलने के लिए काफी था। सिर्फ 117 ‘पिंड क्लिनिक इन-चार्ज’ के अस्थायी पदों के लिए हज़ारों योग्य उम्मीदवार उमड़ पड़े। वह भी तब जब यह नौकरी स्थायी नहीं है और तनख्वाह महज़ 620 रुपये प्रतिदिन है। झुलसाती गर्मी में घंटों लाइन में खड़े उम्मीदवार और व्यवस्था यह थी, कि पीने के पानी तक का इंतज़ाम नहीं था।

    मनसा में 11 पद, 500 उम्मीदवार-

    यह नज़ारा सिर्फ संगरूर में नहीं था। 17 अप्रैल को मनसा में सिर्फ 11 पदों के लिए करीब 500 उम्मीदवार पहुंचे और लगभग 450 ने इंटरव्यू दिया, कई तो भारी भीड़ देखकर वापस लौट गए। लुधियाना में करीब 200 अस्थायी पदों के लिए 1,500 से अधिक उम्मीदवार आए। सिविल सर्जन डॉ. अमरजीत कौर ने बताया, कि भीड़ इतनी ज़्यादा थी, कि एक दिन में सभी उम्मीदवारों को नहीं देखा जा सका और प्रक्रिया अगले दिन भी जारी रही।

    क्या है पिंड क्लिनिक और कौन कर सकता है आवेदन?

    पिंड क्लिनिक योजना मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार की ‘आम आदमी क्लिनिक’ का विस्तार है। इसका मकसद गांव-गांव तक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाना है, जिससे ग्रामीणों को शहर न जाना पड़े। 23 जनवरी को सरकार ने 2,500 पिंड क्लिनिक खोलने की घोषणा की थी।

    पहले चरण में 1,100 क्लिनिक खोले जाएंगे। इन पदों के लिए बीएससी नर्सिंग, जीएनएम डिप्लोमा, एएनएम या फार्मेसी डिप्लोमा-डिग्री धारक आवेदन कर सकते हैं। एक इन-चार्ज दो क्लिनिक संभालेगा, सुबह 8 से 11 बजे एक जगह और दोपहर 12 से 3 बजे दूसरी जगह। साथ में 120 रुपये प्रतिदिन यात्रा भत्ता भी मिलेगा।

    हर घर नौकरी के वादे कहां गए?

    केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इस स्थिति पर तीखा हमला करते हुए एक्स पर लिखा, “यही है ‘बदलाव’ का असली चेहरा। पंजाब के नौजवान सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं। जब हज़ारों योग्य उम्मीदवार सिर्फ 117 पदों के लिए लड़ रहे हों तो ‘हर घर नौकरी’ के वादे कहां छुप गए?” उन्होंने सरकार के ‘रंगला पंजाब’ के नारे पर भी सवाल उठाए।

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    एक नौकरी और लाखों उम्मीदें-

    यह पूरा घटनाक्रम बताता है, कि पंजाब में बेरोज़गारी किस स्तर पर है। जब पढ़े-लिखे नर्सिंग और फार्मेसी डिग्री धारक 620 रुपये रोज़ की अस्थायी नौकरी के लिए घंटों धूप में खड़े रहें, तो यह सवाल उठता है, कि हमारी व्यवस्था कब बदलेगी।

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    By sumit

    मेरा नाम सुमित है और मैं एक प्रोफेशनल राइटर और जर्नलिस्ट हूँ, जिसे लिखने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव है। मैं टेक्नोलॉजी और लाइफस्टाइल टॉपिक के साथ-साथ रिसर्च पर आधारित ताज़ा खबरें भी कवर करता हूँ। मेरा मकसद पढ़ने वालों को सही और सटीक जानकारी देना है।