E100 Fuel: सरकार ने लगभग 100 प्रतिशत एथेनॉल वाले E100 फ्यूल से चलने वाली गाड़ियों का रास्ता आधिकारिक तौर पर साफ़ कर दिया है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में बदलाव अधिसूचित किए हैं। मकसद है फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों को बढ़ावा देना, आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाना और प्रदूषण कम करना। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इसका आपके लिए क्या मतलब है।
सरकार ने क्या बदला?
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने 23 अक्टूबर को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन अधिसूचित किए। इनमें E85 के साथ अब E100 को भी शामिल कर लिया गया है। बदलाव ईंधन के मानकों, उत्सर्जन से जुड़ी तालिकाओं और गाड़ियों की टेस्टिंग के नियमों में किए गए हैं।
कई प्रावधानों में जहां पहले सिर्फ़ E85 लिखा था, वहां अब E100 भी जोड़ा गया है। एक स्पष्टीकरण नोट में साफ़ कहा गया है कि दोनों फ्यूल सिर्फ़ उन फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों में इस्तेमाल हो सकते हैं, जिन्हें कंपनियों (OEM) ने खास तौर पर इसी के लिए बनाया और प्रमाणित कराया हो। संशोधन में गाड़ी के कुल वज़न की सीमा भी 3,000 किलो से बढ़ाकर 3,500 किलो की गई है। ये नियम अचानक नहीं आए। अप्रैल में इनका मसौदा 30 दिन के लिए जनता की आपत्तियों और सुझावों के लिए रखा गया था, उसके बाद अंतिम अधिसूचना जारी हुई।
क्या मौजूदा पेट्रोल कार E100 पर चल सकती है?
नहीं। नए नियमों के तहत आपकी मौजूदा पेट्रोल कार, यहां तक कि E20 पर चलने के लिए बनी कार भी, E85 या E100 इस्तेमाल नहीं कर सकती, जब तक वो खास तौर पर इसके लिए डिज़ाइन और प्रमाणित न हो। सड़क परिवहन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक 20 प्रतिशत से ज़्यादा और 100 प्रतिशत तक एथेनॉल वाले फ्यूल सिर्फ़ ऐसी ही गाड़ियों के लिए होंगे। यानी E100 सिर्फ़ कम्पैटिबल गाड़ियों के लिए है, हर पेट्रोल गाड़ी के लिए नहीं।
फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ी क्या होती है?
ये ऐसी गाड़ी होती है जो एथेनॉल और पेट्रोल के अलग-अलग अनुपात पर चल सकती है। इस बदलाव से कंपनियों को ज़्यादा एथेनॉल वाली गाड़ियां बनाने और बेचने का साफ़ कानूनी ढांचा मिल गया है।
कौन सी कंपनियां तैयारी में हैं?
दिए गए ब्योरे के मुताबिक जून 2026 में मारुति सुज़ुकी ने वैगन-आर फ्लेक्स फ्यूल लॉन्च की, जिसे भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर गाड़ी बताया गया है। ये E20 से E100 तक के ब्लेंड पर चल सकती है। टोयोटा, टाटा मोटर्स और ह्युंडई भी भारतीय बाज़ार के लिए फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां बना रही हैं।
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सरकार को इससे क्या फ़ायदा चाहिए?
एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का बड़ा मकसद आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाना है, जो देश के चालू खाता घाटे की बड़ी वजहों में से एक है। साथ ही इसका मकसद प्रदूषण घटाना भी है। जानकारी के मुताबिक सरकार E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल, 80% पेट्रोल) पहले ही लागू कर चुकी है और 20 प्रतिशत ब्लेंडिंग का लक्ष्य 2030 की मूल समय-सीमा से पहले पूरा कर लिया है। देश की कुल एथेनॉल उत्पादन क्षमता करीब 2,000 करोड़ लीटर बताई गई है, और तेल कंपनियों ने E20 के लिए सालाना 11 अरब लीटर से ज़्यादा के टेंडर जारी किए हैं।
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