1,000 साल पुराना मंदिर ग्वालियर का “मजिस्ट्रेट महादेव” मंदिर, जहां अदालत नहीं, खुद महादेव सुनाते हैं फैसला।

मंदिर की अनोखी पहचान

गिरगांव का शिव मंदिर क्यों कहलाता है ‘मजिस्ट्रेट महादेव’? क्योंकि यहां खड़े होते ही कोई झूठ बोल ही नहीं पाता। भक्त मानते हैं, महादेव तुरंत न्याय देते हैं और मन की मुरादें पूरी करते हैं।

हजार साल पुरानी मान्यता

करीब 1,000 साल पुराना मंदिर, यहाँ शिव पिंडी के साथ पूरा शिव परिवार विराजमान है। पहले लोग छोटे मामलों जैसे भैंस चोरी का निपटारा कराने आते थे। धीरे-धीरे यह जमीन, पैसे और पारिवारिक विवादों का भी समाधान स्थल बन गया।

कोर्ट जैसी लंबी प्रतीक्षा नहीं

यहां कोर्ट-कचहरी जैसी लंबी तारीखें नहीं मिलतीं। वादी-प्रतिवादी दोनों महादेव के सामने खड़े होते हैं और माना जाता है सच तुरंत सामने आ जाता है। झूठ बोलना यहाँ महादेव का अपमान माना जाता है और सजा जीवन में मिलती है।

महादेव की कचहरी का असर

यह सिर्फ मंदिर नहीं, न्याय की कचहरी है। लोग विश्वास के साथ आते हैं और कहते हैं, "महादेव के सामने खड़े होकर झूठ टिक ही नहीं सकता।" यह स्थान लोगों में नैतिकता, सच्चाई और जीवन में संतुलन पैदा करता है।

न्याय और आस्था का संगम

गिरगांव महादेव का मंदिर आज सत्य और न्याय का प्रतीक माना जाता है। भक्त कहते हैं, “महादेव के सामने हर विवाद का हल मिलता है, बस मन में सच्चाई हो।” यही आस्था इसे भारत के सबसे अनोखे मंदिरों में शामिल करती है।